पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में ईएनटी कक्ष में मरीज देखती चिकित्सक शालिनी त्रिपाठी।संवाद
पीलीभीत। मौसम में बदलाव होते ही लोग सर्दी-जुकाम की चपेट में आ रहे है। गले और कानों पर भी मौसम के बदलाव का असर पड़ रहा है। कान में भारीपन महसूस होने पर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। मगर इससे कान के पर्दे पर असर पड़ता है। इसका सामान्य कारण सूजन या संक्रमण हो सकता है। यही वजह है कि इस समय जिला अस्पताल के नाक, कान, गला रोग कक्ष में मरीजोंं की भीड़ जुट रही है।
कान में दर्द होने पर जलन का अनुभव होता है, जो आता-जाता रहता है और स्थिर भी हो सकता है। आमतौर पर लोग कान में गर्म तेल डाल देते हैं। ऐसा करने से बड़ी समस्या हो सकती है। जिला अस्पताल के ईएनटी कक्ष में रोजाना 150-200 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे है।
इसमें अधिकांश में कान के दर्द, कान बहने आदि की समस्या होती है। साथ ही गले में खराश की समस्या होती है। ईएनटी कक्ष के चिकित्सकों का कहना है कि कान और गले में यह समस्याएं मौसम में बदलाव के कारण हैं। ऐसे में कान में थोड़ी सी भी समस्या को नजरअंदाज न करें। चिकित्सक से परामर्श लें।
बच्चों में होती है सबसे ज्यादा समस्या
कान का दर्द, संक्रमण या चोट के कारण हो सकता है। इसमें बाहरी कान दर्द कर सकता है। दांतों से जुड़े कई कारण भी कान के दर्द का कारण बनते हैं। यह समस्या में बच्चों में ज्यादा होती है।
डॉक्टर की सलाह से ही लें दवा
जिला अस्पताल की नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि इन दिनों मौसम में नमी है, ऐसे में फफूंदी पनपने लगती है और कान बहने लगता है। दिक्कत होने पर विशेषज्ञ से सलाह लें। नहाने के बाद कान बड्स से साफ करें ताकि जो पानी है, वह सूख जाए। बच्चों के कान में मोटी बड्स न डालें, अन्यथा कान का पर्दा फटने का डर रहता है। जुकाम होने पर भारीपन, ऊंचा सुनाई देना जैसी समस्या होगी। कान दर्द होने पर में तेल डालना ठीक नहीं है। बिना चिकित्सक की सलाह के भी दवा न लें।