पूरनपुर। मातृभूमि की रक्षा करते हुए बलिदानी सुरेंद्र सिंह लवाणा ने कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। कारगिल की लड़ाई में जांबाज को खोने वाले परिवार के सदस्यों का सीना अब भी गर्व से चौड़ा हो जाता है।
गांव रुदपुर हरीपुर में बलागर सिंह के घर चार जनवरी 1961 को जन्मे शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा 18 अगस्त 1989 में सेना की सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में उनकी तैनाती की गई थी। दस दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेड़ हुई। 29 मई 1999 को वतन की रक्षा में सुरेंद्र सिंह लवाणा बलिदान हो गए थे। सुरेंद्र सिंह को उच्च सेवा मेडल, सिंह सेवा मेडल से पुरस्कृत किया गया था। शहीद की पत्नी गुरमीत कौर ने पति की मौत के दुख को बर्दाश्त करते हुए पूरा ध्यान बच्चों की परवरिश पर लगा दिया।
लवाणा अक्सर अपने दोनों बेटों को फौज में भर्ती कराने की बात पत्नी से कहते थे। पति की शहादत के बाद गुरमीत ने बेटों को बचपन से ही फौज में शामिल होने की प्रेरणा दी। सेना के कुछ अफसर उनके दोनों बेटों को सैनिक स्कूल में भर्ती कराने को अपने साथ ले गए थे। हालांकि सैनिक स्कूल का अनुशासन और कड़ा नियम दोनों को रास नहीं आया और वापस घर लौट आए थे। शहीद की याद आते ही उनके परिजनों के दिल में आज भी टीस होती है। शहीद परिजन को आज भी समाज से मिल रहे सम्मान को लेकर गर्व है।
हादसे में बड़े और बीमारी से छोटे बेटे की चली गई जान
पूरनपुर। शहीद के परिवार में पत्नी के अलावा पुत्रवधू, पौत्री जैयस, वानी, परी, बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की विधवा पत्नी सतनाम कौर, पौत्र गुरप्रीत सिंह, वीरेंद्र सिंह, पुत्री नरेंद्र कौर, पलविंदर कौर हैं। पुत्रियों की शादी हो चुकी है। बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की कई साल पहले एक हादसे में और छोटे पुत्र की बीमारी के चलते करीब एक साल पहले मौत हो चुकी है।
कारगिल युद्ध में लड़े, शिक्षक बनकर पढ़ा रहे देश सेवा का पाठ
बिलसंडा। कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेने वाले सेवानिवृत्त एसीपी नायब सूबेदार कृष्ण पाल वर्मा शिक्षक बनकर छात्रों को देश सेवा का पाठ पढ़ा रहे हैं। उनका एक भाई एसएसबी में तैनात है। परिवार में देश सेवा का जज्बा भरा है।
कृष्ण पाल वर्मा ने बताया कि 26 मई 1999 को ऑपरेशन विजय शुरू हुआ। उन्हें भी कारगिल युद्ध में शामिल होने का मौका मिला। वह दुश्मनों से लड़े। तीन बार में सात वर्ष कश्मीर में सेवा की। इसमें कारगिल, फिरोजपुर, बारामुला आदि शामिल रहा। अरुणाचल प्रदेश, असम व नागालैंड में भी तैनाती रही। वर्ष 2014 में 19 साल बाद पेंशन पर गए। इसके बाद शिक्षा विभाग में अध्यापक के रूप ज्वाइन किया। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद पीलीभीत के जिला अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। नौजवानों में देश के प्रति सेवा भाव बना रहे, इसको लेकर उन्हें मार्गदर्शन देते हैंं। बताया कि छोटा भाई भी एसएसबी में निरीक्षक पद पर कार्यरत है। संवाद
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आज
पीलीभीत। कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में पीलीभीत जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की ओर से शनिवार को स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर उन वीर जवानों की याद में आयोजित किया जा रहा है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. परीक्षित ने बताया कि शिविर सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा। उन्होंने कहा समय से रक्तदान से हम सिर्फ रक्तदान नहीं करते बल्कि ज्यादा हिमोग्लोबिन बढ़ने वाली बीमारियों से खुद को दूर रखते है। संवाद