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बॉडी बिल्डिंग में चमकीं सुरभि, जीते दो पुरस्कार

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मुंबई में आयोजित प्रतियोगिता में अवार्ड प्राप्त करती सुरभि जैसवार। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। छोटे शहर की युवतियां अब न केवल बड़े सपने देख रहीं हैं बल्कि उन्हें साकार करने के लिए घर और शहर छोड़कर बड़े शहरों में जाकर तैयारी कर रही हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भागीदारी कर रही हैं। ऐसी ही एक युवती है 25 वर्षीय सुरभि जैसवार। सुरभि की कामयाबी की कहानी उन तमाम युवतियों के लिए प्रेरक है जो छोटे शहर और गांव में रहती हैं लेकिन बॉडी बिल्डिंग में अपना करियर बनाना चाहती हैं। सुरभि ने बताया कि वह तीन वर्ष पहले शहर के एक निजी जिम में फिटनेस के लिए प्रैक्टिस करने पहुंची। जिम और इंटरनेट सर्चिंग के दौरान उसने उन मॉडल्स के चित्र देखे जो बॉडी बिल्डिंग में देश-विदेश तक छाए हुए हैं। उन्हें देखकर बॉडी बिल्डिंग में आगे बढ़ने का जज्बा जागा। इसके बाद पीलीभीत शहर के जिम में लगातार खुद को निखारा। फिर गुरुग्राम जाकर ढाई वर्ष तक प्रैक्टिस की। इस दौरान कई छोटी बड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया लेकिन बड़ी कामयाबी उसे तब मिली जब उसने मुंबई के गोरेगांव में तीन से पांच दिसंबर को आयोजित इंटरनेशनल हेल्थ स्पोर्ट्स ऐंड फिटनेस फेस्टिवल में आयोजित फीमेल मॉडल सर्च श्रेणी में भाग लिया। इस श्रेणी में आयोजित शेरू क्लासिक 2021 प्रतियोगिता में उसने सबको पछाड़ कर पहला स्थान पाया। जबकि अमेच्योर ओलंपिया में दूसरा स्थान पाया। प्रतियोगिताओं में भारत समेत 17 देशों की महिला प्रतिभागी शामिल हुईं। दो पुरस्कार जीतने से सुरभि को फिटनेस मॉडल के बीच ख्याति मिली है।
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अब फिटनेस के लिए जागरूक हो रहीं युवतियां
सुरभि जैसवार की उपलब्धि से युवतियां उत्साहित हैं। उन्हें इस बात की खुशी है कि पीलीभीत की एक युवती ने बॉडी बिल्डिंग में जिले का नाम रोशन किया है। युवतियों का कहना है कि यह छोटा शहर है तो यहां पर बॉडी बिल्डिंग जैसी प्रतियोगिताएं नहीं होती हैं लेकिन फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। अब युवतियां भी जिम जाने लगीं हैं।
मैं छह महीने से जिम आ रही हूं। अब मैं पहले के मुकाबले अधिक फिट हूं। अगर फिटनेस को लेकर सतर्कता दिखाएंगे तो खुद को सुरक्षित रखना आसान होगा। आत्म क्षा भी कर सकेंगे।
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- सुरभि
मैं नियमित जिम आती हूं। जिम में प्रैक्टिस करना अब मेरी लाइफ का हिस्सा बन गया है। खुद की फिटनेस के लिए एक घंटे रोजाना देती हूूं। इसका मुझे फायदा मिल रहा है।
- वैशाली सक्सेना
मेरी उपलब्धि में परिवार को सपोर्ट मुख्य है। मैं चैलेंज को अपनी ट्रेनिंग का हिस्सा मानती हूं। जब कोई चैलेंज आता है तो मैं और मजबूत होकर उभरती हूं। ऐसे में युवतियों से यही कहूंगी कि वे अपने को कभी कमजोर न समझें।
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- सुरभि जैसवार, पुरस्कार विजेता
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