सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण का लाभ पाकर प्रोमशन पाए लोगों को रिवर्ट करने के आदेश दिए थे। इस पर सभी विभागों में इस श्रेणी में आने वाले अधिकारी कर्मचारियों को रिवर्ट किया जाना है लेकिन बीएसए और राजस्व कई विभागों ने अभी इसे लागू नहीं किया है। जबकि पुलिस, पीडब्ल्यूडी व विकास विभाग में इसे लागू कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी विभागों को शासनादेश जारी किया गया था। इसमें सबसे पहले अभियंताओं पर इसकी कार्रवाई हुई और कई अभियंता रिवर्ट हुए। इसके बाद पुलिस विभाग में आठ उपनिरीक्षकों को रिवर्ट कर हेड कांस्टेबिल बना दिया। कुछ दिनों बाद ही विकास विभाग में प्रोन्नत पाकर चार बाबुओं और एक अधिकारी को रिवर्ट किया गया। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग में अभी तक ऐसे लोगों को चिन्हित कर सूची ही नहीं तैयार हो सकी है। कमोवेश यही हाल राजस्व विभाग का भी है। बेसिक शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो सभी ब्लाकों से इस श्रेणी में आने वाले अध्यापकों व लिपिकों की सूची मांगी गई है लेकिन अमरिया व बरखेड़ा की सूची अभी तक नहीं पहुंची है, जिससे आदेश जारी नहीं हो पा रहा है। वहीं सबसे ज्यादा खराब हालत राजस्व विभाग की है। यहां सुप्रीम कोर्ट का आदेश जारी होने के बाद आनन फानन में चार राजस्व कानूनगो को प्रमोशन देकर नायब तहसीलदार बनाकर गैर जनपद स्थानांतरित कर दिया गया। इस डिमोशन संबंधी शासनादेश आने के बाद भी उन्हें रिवर्ट नहीं किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ऐसा उन्हें वेतन का लाभ देने के लिए किया जा रहा है। बताते हैं शासनादेश में प्रोन्नत पद पर एक माह से अधिक समय तक वेतन मिलने यदि डिमोशन होता है तो प्रोन्नत पद का ही वेतन ही दिया जाएगा। शायद इसी के चलते मामले को लटकाया जा रहा है।
सर्वजन हिताय समिति कर चुकी है शिकायत
सुप्रीम कोर्ट के आदेश बाद भी कई विभागों में अब तक इसे लागू न करने पर सर्वजन हिताय समिति के संरक्षक हशमुद्दीन खां और हरदेव शर्मा ने डीएम को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई की है।
आरक्षण का लाभ लेकर प्रोन्नति पाने वालों को चिंहित कर रिवर्ट किया जा रहा है। यदि किसी विभाग में ऐसा नहीं हुआ तो जांच कराएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराया जाएगा।
मासूम अली सरवर, डीएम