गन्ना मूल्य भुगतान के बदले बजाज मिलों द्वारा किसानों को चीनी उपलब्ध कराए जाने से बाजार में चीनी के दाम गिरने लगे हैं। इससे अन्य मिलों की चीनी बिक्री प्रभावित हो रही है। एलएच शुगर मिल ने भुगतान के बदले चीनी वितरण की प्रक्रिया को बंद कराने की मांग की है।
जिले की चार चीनी मिलों में शहर स्थित एलएच शुगर मिल भुगतान में सबसे आगे हैं जबकि बरखेड़ा स्थित बजाज मिल सबसे पीछे। भुगतान न कर पाने की स्थिति में अब बजाज की बरखेड़ा के अलावा मकसूदापुर एवं बहेड़ी की मिलों से किसानों को गन्ना मूल्य के सापेक्ष चीनी दी जा रही है।
किसानों से यह चीनी बाजार में पहुंच रही है जिससे चीनी के दाम घटने लगे हैं। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए एलएच मिल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें उपाध्यक्ष जोगेंद्र सिंह व प्रबंधक आरके अग्रवाल ने बताया है कि चीनी के दाम गिरने से मिल को घाटा उठाना पड़ रहा है। मिल अधिकारियों का कहना है कि अन्य मिलों द्वारा चीनी दिए जाने से किसानों को भी नुकसान हो रहा है।
मिल से बाजार भाव की अपेक्षा कम रेट पर चीनी दी जा रही है जिसे किसान और कम दाम पर बाजार में बेचने को मजबूर हैं। बाजार में चीनी का थोक दाम 2540 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि बजाज मिल से निकल रही चीनी को किसान मौके पर ही 2400 या इससे भी कम दाम पर व्यापारियों से नकद भुगतान लेकर बेच रहे हैं। बाजार में सस्ती चीनी पहुंचने से थोक बिक्री में गिरावट आ गई। हालंाकि इस मंदी के बाद भी मिल ने भुगतान बंद नहीं किया है। मिल प्रबंधन ने मिलों से चीनी वितरण की प्रक्रिया को बंद कराने की मांग शासन से की है।