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नगरपालिका की स्ट्रीट लाइट खरीद में 75 लाख से ज्यादा का गोलमाल

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बरेली नगर निगम
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बरेली। नगरपालिका में यूं तो एक से बढ़कर एक घोटाले चर्चित रहे। मगर, हाल ही में नगरपालिका ने जेम पोर्टल के जरिए जिन 1500 स्ट्रीट लाइटों की खरीद किया जाना बताया है, उसमें 75 लाख से ज्यादा का गोलमाल सामने आ रहा है। बरेली की एक फर्म से नगरपालिका ने हैलोनिक्स कंपनी की 45 और 75 वॉट की ये जो एलईडी स्ट्रीट लाइटें खरीदी हैं, उनके दाम बाजार में उपलब्ध इन्हीं लाइटों के दामों से तीन-चार गुना ज्यादा हैं। यही कारण है कि लाखों के घोटाले में बंदरबांट के लिए अब सभासदों और ऊंचे पदों पर बैठे जिम्मेदारों के बीच घमासान मचा है।
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नगरपालिका ने हाल ही में जो 1500 स्ट्रीट लाइटें शहर में लगाने के लिए खरीदीं उनमें 75 वॉट की एक स्ट्रीट लाइट के लिए 8050 रुपये और 45 वॉट के लिए 4940 भुगतान किया गया। नगरपालिका ने 1000 स्ट्रीट लाइटें 75 वॉट और 500 लाइटें 45 वॉट की खरीदीं। इस तरह से देखा जाए तो नगरपालिका की ओर से 75 वॉट की लाइटों का 80,50,000 और 45 वॉट की लाइटों का 24.70 लाख रुपये खर्च उठाया। इस तरह से नगरपालिका ने 1500 स्ट्रीट लाइटें एक करोड़ पांच लाख 20 हजार रुपये में खरीदीं। नगरपालिका ने जिस हैलोनिक्स कंपनी की स्ट्रीट लाइटें खरीदी हैं, उसी कंपनी की 75 वॉट की एक लाइट 2200 रुपये बाजार में उपलब्ध है। वहीं 45 वॉट की प्रति लाइट की कीमत 1500 रुपये है।
बरेली के एक थोक बिजली कारोबारी के अनुसार अगर उनके शोरूम से ये लाइटें खरीदी जातीं तो वह हैलोनिक्स कंपनी की 75 वॉट की 1000 स्ट्रीट लाइटें 22 लाख रुपये में और 45 वाट की 500 स्ट्रीट लाइटें 7.5 लाख रुपये में दे देते। नगरपालिका को कुल 1500 स्ट्रीट लाइटें 29.50 लाख रुपये में मिल जातीं। इसका मतलब साफ है कि नगरपालिका ने 29.50 लाख की स्ट्रीट लाइटों को जेम पोर्टल के माध्यम से 1.05 करोड़ से अधिक कीमत में खरीदना बताकर 75.0 लाख रुपये से अधिक का भुगतान दर्शा दिया। अब यही रकम कमीशन में बंटने के लिए सभासदों से लेकर ऊंचे पदों पर बैठे लोगों तक में झगड़ा चल रहा है।
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बिना सत्यापन कराए हो गया भुगतान
नगरपालिका ने बोर्ड की कमेटी से सत्यापन कराए बिना स्ट्रीट लाइट खरीद का पूरा भुगतान कर दिया। नगरपालिका बोर्ड में किसी भी खरीद के लिए पांच सदस्यीय कमेटी है। इस कमेटी में संजीव सक्सेना, सुनीता सिंह, चेतन गंगवार, शिवली अहमद और राजदा बी शामिल हैं। इस कमेटी से सत्यापन कराए बिना पूरा भुगतान हो गया। संजीव सक्सेना खुद कह रहे हैं कि भुगतान तो पहले ही हो गया था, सत्यापन तो उनसे बाद में कराया गया। हैरानी की बात यह है कि एसडीओ बिजली ने लाइट खरीद का सत्यापन किया। उसमें लाइट खरीद की कीमत सही भी बताई गई।
हम जेम पोर्टल पर लाइट खरीद को अपलोड कर देते हैं। उसमें जिस कंपनी के रेट सबसे कम होते हैं, उसे ही लाइट आपूर्ति के आदेश दे दिए जाते हैं। इस मामले में हम फाइल देखकर पूरी बात बताएंगे। -निशा मिश्रा, ईओ नगरपालिका
नगरपालिका में स्ट्रीट लाइटों की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से हुई थी। लाइट खरीद के रेट पोर्टल पर ही पड़े थे। जिस कंपनी का टेंडर किया गया, उसका रेट सबसे कम था। उसी हिसाब से लाइटों की खरीद हुई। -विमला जायसवाल, चेयरमैन
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