पीलीभीत। राष्ट्रीय खेल होने के बाद भी हॉकी के प्रति खिलाड़ियों का लगाव कम होता जा रहा है। कारण सिर्फ एक है, सरकार खिलाड़ियों पर कोई खास ध्यान नहीं दे रही है। जहां एक तरफ हॉकी के खेल में कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर तक जिले का नाम रोशन किया है। इसके बाद भी दक्ष खिलाड़ियों और सीखने आने वाले नए खिलाड़ियों को खेल के संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे। इससे वे अपनी प्रैक्टिस बेहतर ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। इस कमी के चलते प्रतिभाएं दम तोड़ रही है।
गांधी स्टेडियम में हॉकी के नए खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए दो बैच चलाए जा रहे हैं। इसमें में मात्र 35 खिलाड़ी हॉकी की प्रैक्टिस कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों को हॉकी कोच आबिद अली के द्वारा ट्रेनिंग दी जा रही है। एक तरफ खेलो इंडिया के तहत विभिन्न खेलों में खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए सुविधाएं देने का दावा किया जाता है वहीं गांधी स्टेडियम में हॉकी की प्रैक्टिस कर रहे इन खिलाड़ियों को मात्र एक महीने में 24 बॉल के अलावा कोई संसाधन मुहैया नहीं कराया जाता है। ऐसे में बच्चों को ट्रेनिंग देने वाले आबिद अली किट मुहैया कराते हैं या फिर खिलाड़ी स्वयं अपने पास से स्टिक लाकर हॉकी की प्रैक्टिस कराते हैं। कुछ समाजसेवी संगठनों के द्वारा कभी कभी मदद दी जाती है। कुल मिलाकर हॉकी के लिए इतना बड़ा सरकारी अमला है। लेकिन खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के नाम पर प्रयास नहीं किया जाता है। इन्हीं कारणों के चलते हॉकी में नए खिलाड़ी पारंगत हासिल नहीं कर पा रहे हैं और हॉकी दम तोड़ती हुई नजर आ रही है।
खिलाड़ी बोले ....
सरकार को खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं देनी चाहिए। बिना सुविधाओं के तरक्की कैसे होगी। - अनंता खान, हॉकी खिलाड़ी
सरकार को गरीब बच्चों का विशेषकर ध्यान रखना चाहिए ताकि खेल में वह तरक्की कर सकें। - राज गौरव, हॉकी खिलाड़ी
सरकार को खिलाड़ियों को किट देनी चाहिए। ताकि वे खेल में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। - वैभव यादव, हॉकी खिलाड़ी
सरकार खिलाड़ियों से उम्मीद तो बहुत करती हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर केवल बॉल दी जाती है। - निहारिका, हॉकी खिलाड़ी
बोले अधिकारी...
खेल में सरकार की ओर से मिलने वाली हर सुविधा को खिलाड़ियों को मुहैया कराई जाती है। अगर किसी खिलाड़ी को किसी प्रकार की कोई दिक्कत होती है तो उसका निस्तारण किया जाता है। - राजकुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी