- वर्ष 2021-22 में शिकायत के बाद खुला था ग्राम पंचायतों में करोड़ों का गोलमाल
- डीएम की सख्ती के बाद प्रधानों और सचिवों को जारी किए गए थे वसूली के नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइट घोटाले के मामले में जब पंचायत विभाग की ओर से सचिवों के वेतन से वसूली शुरू की गई थी। वसूली के रूप में कुछ सचिवों से एक माह की वसूली भी हुई। इसके बाद सचिव कोर्ट की शरण चले गए। अब तक न्यायालय ने 21 सचिवों को वसूली को लेकर स्टे दिया है। इसकी कॉपी भी अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है।
ग्राम पंचायतों में लगाई गई स्ट्रीट लाइटोें में घपलेबाजी को लेकर वर्ष 2021-22 में कई शिकायतें हुईं थी। शिकायतों के बाद डीएम के निर्देश पर कमेटी गठित कर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने मामले को दबा दिया और सुस्त गति से कार्रवाई को आगे बढ़ाया। इससे करीब डेढ़ साल बाद भी कुछ नहीं हो सका।
यही नहीं वसूली के आदेश भी जिम्मेदार जारी नहीं कर सके। लापरवाही को लेकर जब डीएम ने कार्रवाई के लिए सख्ती की तो तत्कालीन डीपीआरओ ने दोषी पाए गए सचिवों और प्रधानों को नोटिस जारी किए। नोटिस के बाद मामले को फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा तो वसूली के नोटिस जारी किए गए। इसमें कुछ प्रधानों ने धनराशि सरकारी खाते में जमा कर दी थी तो सचिवों की भी पहली किस्त कट गई। पहली किस्त कटने के बाद सचिवों ने कोर्ट की शरण ली। इसके बाद स्टे आने शुरू हो गए। अब तक 21 सचिवों की ओर से अधिकारियों को स्टे आर्डर की कॉपी दी गई है। इससे एक बार फिर से वसूली की प्रक्रिया जहां की तहां ठहर गई गई है।