क्षेत्र को शारदा की बाढ़ से बचाने के लिए खानापूर्ति की जा रही है। बाढ़
खंड ने पुराने स्परों की मरम्मत शुरू करा दी है। वहीं लोगों का कहना है कि
सिर्फ स्परों में रेत भर देने से बचाव का कोई ठोस इंतजाम नहीं हो सकेगा।
शारदा
की बाढ़ से क्षेत्र को नुकसान होता है, लेकिन बाढ़ विभाग मरम्मत और बचाव
के नाम पर गोलमाल कर करोड़ों रुपये खर्च कर देता है। इस बार बाढ़ से बचाव
के लिए अभी तक धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। फिर भी विभाग ने अन्य मदों से
काम शुरू कराए हैं। गुरुवार को अधिशासी अभियंता दो सहायक अभियंताओं क्रमश:
राजेंद्र यादव व श्याम सिंह बघेल के साथ रमनगरा क्षेत्र पहुंचे।
यहां
उन्होंने सबसे पहले नौजल्हा नंबर दो पर पहुंचकर गत वर्ष बाढ़ से
क्षतिग्रस्त हुए स्पर का निरीक्षण किया और की क्षतिग्रस्त बैडवार एवं नोज
को जीओ बैग में रेत भरवा कर ठीक कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी
का दायां किनारा सुरक्षित करना जरूरी है। यदि स्पर से कटान हुआ तो बड़ा
नुकसान हो सकता है। इसके कुछ देर बाद ही बिना एग्रीमेंट एवं वर्कआर्डर के
इस पर काम भी शुरू करा दिया गया।
नौजल्हा नंबर दो के पास ही एक सप्ताह
पूर्व बनाए गए बल्ला कटर में डाली गई झाड़ झंकाड़ और मिट्टी भी नीचे बैठी
मिली जिस पर उन्होंने कटर को ठीक कराने के निर्देश दिए। नौजल्हा के बाद टीम
नगरिया खुर्द कलां पहुंची और प्रस्तावित स्पर निर्माण स्थल को देखने के
बाद अभियंताओं से बारिश से पहले ही रेत एकत्र कराने के निर्देश दिए। अब
कट्टों में भरी रेत से चल रहा यह निर्माण से बाढ़ रोकने में कितना मददगार
साबित होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।