पीलीभीत। न समय से प्रतियोगिता के बारे में जानकारी दी गई और न ही खाने का प्रबंध किया गया, ऐसे में खाली पेट ही बिना तैयारी विभिन्न स्पर्धाओं में भाग लेना पड़ रहा। ठहरने की व्यवस्था की गई है पर रात में ओड़ने के लिए चादर तक नहीं दी गई। ऐसे में अच्छा प्रदर्शन भी नहीं कर पा रहे हैं। कुछ ऐसा कहना है यहां गांधी स्टेडियम में चल रही तीन दिवसीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे प्रतिभागियों का। वह अव्यवस्थाओं को लेकर काफी नाखुश हैं।
न्यूरिया के एके इंटर कॉलेज के छात्र दीपेश भारती रविवार सुबह आठ बजे प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे। दिपेश को शनिवार को ही पता चला कि उनको हिस्सा लेना है। दिपेश ने पांच किलोमीटर दौड़ में भाग लिया, लेकिन जीत नहीं पाए। दिपेश ने बताया-स्टेडियम में खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी। पांच किलोमीटर की दौड़ खत्म हुए कुछ ही समय बीता था कि फिर चार सौ मीटर दौड़ का एलान कर दिया गया। नाम होने के कारण दौड़ में शामिल होना पड़ा। थकान और भूख के बावजूद दौड़े, लेकिन सफलता इस बार भी हाथ नहीं आई। यही हाल एके इंटर कॉलेज के छात्र रेहान का रहा। बिना तैयारी के वह भी गांधी स्टेडियम पहुंचा। पहले तीन किलोमीटर दौड़ में प्रतिभाग किया। खाने-पीने के संबंध में किसी ने नहीं पूछा। सुबह आठ बजे से दिन में एक बजे तक खाने को कुछ नहीं मिला। खुद के खर्च से केले मंगवाकर खाए।
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जैसे-तैसे रात काटी, सुबह खाली पेट लगाई दौड़
गभिया सहराई इंटर कॉलेज के छात्र विशाल राजभर का कहना था शनिवार को प्रतियोगिताओं में भाग लिया। रात को आयोजकों ने ड्रमंड कालेज के हॉल में ठहरने के इंतजाम किए। वहां पहुंचने पर जमीन पर गद्दे बिछे थे। शरीर ढकने के लिए कुछ नहीं था। कंबल साथ लाए थे। किसी तरह रात काटी, रविवार सुबह आठ बजे फिर स्टेडियम पहुंच गए। खाने-पीने को कुछ नहीं मिला। खाली पेट तीन किलोमीटर दौड़ में भाग लिया। फिर भी चौथे नंबर पर आए। गभिया कॉलेज के ही सूर्यकांत ने बताया कि चक्का फेंक प्रतियोगिता में भाग लेने शनिवार को पहुंचे थे। रात को ड्रमंड कॉलेज में रुके। रात को स्कूल के स्टाफ की ओर से खाने की व्यवस्था की गई, लेकिन रविवार को दिन में एक बजे तक खाने को कुछ नहीं मिल सका।
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विद्यार्थियों ने जताई नाराजगी
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 60 किलोमीटर दूर से आए। शनिवार रात खाना मिला, लेकिन रविवार को आधा दिन बीत गया, खाने को कुछ नहीं मिला। खाली पेट ही दौड़ लगाई।
- विशाल
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ठहरने का इंतजाम किया गया। ठंड से बचने के लिए कंबल साथ लाए थे। उसी से शरीर को ढका। रविवार एक बजने को है, रात से खाना खाए हुए हैं। भूख लग रही है लेकिन खाने को कुछ नहीं दिया गया।
- सूर्यकांत
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प्रतियोगिता की जानकारी समय से नहीं दी गई। बिना तैयारी के प्रतिभाग किया। एक के बाद एक दौड़ में शामिल हुए। अगर पहले से बता दिया जाता तो तैयारी से आते।
- रेहान
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जानकारी न होने के कारण बिना तैयारी के पांच किलोमीटर दौड़ लगाई। फिर दूसरी दौड़ का नंबर आने वाला है, खाने-पीने की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में कैसे जीत पाएंगे।
- दिपेश