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Pilibhit News: नेपाल-उत्तराखंड से घिरे पीटीआर की रखवाली करेगी स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स

Wed, 23 Sep 2026 12:24 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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पीलीभीत टाईगर रिजर्व में शावकों के साथ भ्रमण करता बाघ। स्रोत- विभाग
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अमित पांडेय
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पीलीभीत। नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटे पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की सुरक्षा अब विशेष बाघ संरक्षण बल के हवाले करने की तैयारी है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े जंगल, नेपाल से करीब 10 किलोमीटर खुला सीमा क्षेत्र और उत्तराखंड से लगती वन पट्टी पीटीआर की सुरक्षा को चुनौतीपूर्ण बनाती है। ऐसे में बाघों समेत दूसरे वन्यजीवों को शिकारियों से बचाने, जंगल में अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखने और मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों में त्वरित कार्रवाई के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) गठित करने की कवायद तेज हुई है।
इसको लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव, उत्तर प्रदेश के कार्यालय ने पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर को पत्र भेजा है। इसमें प्रस्ताव का परीक्षण कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है। एसटीपीएफ के गठन के बाद प्रशिक्षित जवानों को विशेष रूप से बाघ संरक्षण, शिकार निरोधक अभियान, जंगल में गश्त और वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए लगाया जाएगा।
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वन विभाग के अनुसार, यहां इस समय करीब 80 बाघ, 30 से अधिक शावक, तेंदुआ, हाथी, गैंडा, हिरन, सांप समेत कई प्रकार के वन्यजीवों का बसेरा है। ऐसे भौगोलिक हालात में केवल सामान्य गश्त के बजाय प्रशिक्षित और समर्पित दस्ते की जरूरत महसूस की जा रही है। विशेष बल जंगल के संवेदनशील मार्गों, सीमा से जुड़े इलाकों और वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में निगरानी को मजबूत करेगा। संवाद
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बाघों की सुरक्षा से लेकर शिकारियों पर कार्रवाई तक जिम्मा
प्रस्तावित एसटीपीएफ का मुख्य काम बाघों और दूसरे संरक्षित जीवों की सुरक्षा रहेगा। बल को अवैध शिकार रोकने, शिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने, संदिग्ध आवाजाही की जानकारी जुटाने तथा जरूरत पड़ने पर जंगल में कार्रवाई करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रस्ताव में साफ किया गया है कि इस बल को सामान्य पुलिस अथवा दूसरे जिलों के कार्यों में नहीं लगाया जाएगा। इसका इस्तेमाल विशेष रूप से टाइगर प्रोटेक्शन के लिए होगा। फील्ड डायरेक्टर को बल की तैनाती और उसके माध्यम से किए गए कार्यों की मासिक रिपोर्ट राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को भेजनी होगी।
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112 कर्मियों की होगी प्रस्तावित तैनाती
एसटीपीएफ के लिए तैयार खाके में कुल 112 पद प्रस्तावित हैं। इनमें एक सहायक वन संरक्षक, तीन रेंज अधिकारी, 18 वन दरोगा और 90 वनरक्षक शामिल हैं। इन्हें वन क्षेत्र में कार्रवाई के लिए विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। राज्य पुलिस विभाग और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के सहयोग से जवानों को शिकार निरोधक अभियान, जंगल में खुफिया सूचना आधारित कार्रवाई, शारीरिक दक्षता और कठिन भूभाग में ऑपरेशन का प्रशिक्षण देने की योजना है।
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117.92 किमी वन सीमा पर हो चुकी है फेंसिंग
पीटीआर में सुरक्षा के लिए वन सीमा पर पहले से भी इंतजाम किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार 51 किलोमीटर सीमा पर सोलर तार फेंसिंग और 66.92 किलोमीटर हिस्से में चेनलिंक फेंसिंग पूरी कराई जा चुकी है। इस तरह कुल 117.92 किलोमीटर वन सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है। अब विशेष बल की तैनाती से गश्त और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की योजना है।
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वाहन, हथियार और निगरानी उपकरण भी मिलेंगे
प्रस्ताव के अनुसार एसटीपीएफ को छह मोटरसाइकिल, तीन हल्के वाहन, दो ट्रक और एक एंबुलेंस समेत कुल 12 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। जवानों के लिए हथियार और आवश्यक सुरक्षा सामग्री के साथ दिन और रात में निगरानी करने वाले उपकरण भी प्रस्तावित हैं।
बल के लिए आवासीय एवं प्रशासनिक परिसर विकसित करने की योजना भी तैयार की गई है। इसमें एसीएफ और रेंज अधिकारियों के आवास, वन दरोगाओं के आवास, बैरक, मेस, कार्यालय तथा परेड एवं खेल मैदान शामिल हैं।
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73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला है रिजर्व
नौ जून 2014 को जारी पीलीभीत टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 73,024.98 हेक्टेयर है। इसमें 60,279.80 हेक्टेयर कोर तथा 12,745.18 हेक्टेयर बफर क्षेत्र शामिल है। माला, महोफ, बराही, हरिपुर और डियोरिया इसकी प्रमुख रेंज हैं। रिजर्व का उत्तरी हिस्सा नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा है, जबकि दूसरी दिशा में उत्तराखंड की वन सीमा जुड़ती है।
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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन में टाइगर रिजर्व के लिए विशेष सुरक्षा बल की व्यवस्था का उल्लेख है। दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए एसटीपीएफ गठित की जा चुकी है। इसी व्यवस्था के आधार पर पीटीआर के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है।
- मनीष सिंह, डीएफओ पीटीआर
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