राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय को दी गई पांच एकड़ भूमि के बदले में निर्माण एजेंसी ने समूची भूमि हथियाकर उस पर भवन निर्माण शुरू करा दिया। ऐसे में प्रस्तावित ब्लाक को दी गई एक एकड़ भूमि मात्र अभिलेखों में ही सिमट कर रह गई।
क्षेत्र में शिक्षा के पिछड़ेपन को दूर करने को कस्बा वासियों ने वर्ष 1966 में चकबंदी के दौरान अपनी कृषि भूमि से कटौती कर अलग अलग प्लाटों में उसे विभाजित कर सुरक्षित कराया था, जिसमें 12.39 एकड़ भूमि माधोटांडा के मौजा परसरामपुर, 11 एकड़ बसंतपुर नौनेर व छह एकड़ भूमि माधोटांडा थाने से सटे इलाके में छोड़ी गई थी। इस भूमि पर एक स्कूल व खेल मैदान बनाने का प्लान बनाया गया था, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाए कि पांच दशक बीतने के बाद निर्माण को दूर की बात, इसकी आय का बंदरबांट होता आ रहा है।
राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय को मिली मंजूरी
लंबे समय तक कुछ हासिल नहीं हुआ तो प्रधान राजेश सिंह ने राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय के लिए डिमांड आने पर जिला प्रशासन को पांच एकड़ भूमि का प्रस्ताव कर दिया था। गत वर्ष जब भवन निर्माण शुरू हुआ तो निर्माण एजेंसी ने भूमि का बिना सीमांकन कराए ही कार्य शुरू करा दिया। जब बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू हुआ तो पता लगा कि निर्माण एजेंसी ने समूची भूमि ही कब्जा ली है।
इसी भूमि पर बनना है नया ब्लाक
तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में माधोटांडा में नया ब्लाक बनाने की घोषणा की गई थी। जिला प्रशासन ने छह एकड़ भूमि से ग्राम प्रबंध समिति से ब्लाक के लिए एक एकड़ भूमि का प्रस्ताव कराकर शासन को भेजा गया था। इस भूमि पर विद्यालय का निर्माण तो जारी है लेकिन ब्लाक को मिली भूमि मौके से नदारद है। अब ब्लाक के लिए जमीन कहां से आएगी, इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
भूमि का कराया जाएगा सीमांकन
भूमि का सीमांकन कराने को पत्र भेजा जा रहा है। डीएम से मिलकर ब्लाक के लिए सुरक्षित भूमि को सीमांकन कर निकलवाएंगे, ताकि ब्लाक बन सके।
किरन सिंह, ग्राम प्रधान