शारदा के कटान से जब तबाही मचने लगी तो सिंचाई विभाग को स्थाई फ्लड फाइटिंग के कार्य कराने को मजबूर होना पड़ा। यदि यह कार्य एक माह पूर्व करा दिए गए होते तो कृषि फसलों से लहलहाती भूमि के कटान को रोका जा सकता था। सरकार की स्वीकृत परियोजनाओं के लिए धन आवंटित न करने से नहरोसा में भूटकान बढ़ता जा रहा है।
शारदा नदी हर साल किसी न किसी इलाके में बाढ़ के समय भू कटान कर तबाही मचाती है। इसका अहसास भी नदी पर बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने वाले सिंचाई महकमे को होता है। इसी के चलते बाढ़ खंड के अफसरों ने प्राथमिकता के आधार पर कटान रोकने को नगरियाखुर्द कलां व नहरोसा क्षेत्र में दो प्रोजेक्ट बनाकर भेजे थे। सरकार ने भी दोनों बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को स्वीकृत तो कर लिया, लेकिन धन आवंटित नहीं किया। इसका नतीजा यह निकला की नदी ने दोनों स्थानों पर जलस्तर बढ़ने पर भू कटान शुरू कर दिया था। नगरियाखुर्द कलां में बने स्परों के नोज को क्षतिग्रस्त कर दिया था, लेकिन बाढ़ खंड ने कोई ठोस कार्य नहीं कराया। तत्कालीन डीएम ओएन सिंह ने नगरियाकलां का दौरा किया तो बाढ़ खंड के अभियंताओं से नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल जियो बैग लगाकर स्परों की नोज को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उसके बाद नोज की मरम्मत हो जाने से इलाके में कटान रुक गया था, लेकिन बाढ़ खंड के अभियंताओं ने नहरोसा क्षेत्र में कोई बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए और स्थिति बिगड़ती गई। बरसात से लेकर अब तक 40 एकड़ से अधिक भूमि का सफाया हो गया और जब अधिक हो हल्ला मचने लगा तो बल्लियां लगाकर बल्ला क्रेट बनाने और जियो बैग से बल्ला कटर बनाने शुरु किए गए। यदि समय से पहले ही यह मरम्मत कार्य शुरू करा दिए गए होते, तो आज नहरोसा क्षेत्र में इतनी बर्बादी नहीं होती।
नदी का कटान रोकने को बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू करा दिए गए हैं। निश्चित ही इन कार्यों से भूकटान पर रोक लगेगी। अभियंताओं को इस पर पैनी निगाह रखने के निर्देश दिए गए हैं।
-मिन्हाज अहमद अधिशासी अभियंता