ग्रामीण इलाके में कैश की किल्लत बरकरार
नोटबंदी की समय सीमा समाप्त होने के बाद सोमवार को बैंक खुले लेकिन कैश की कमी के चलते लोगों को मायूस होना पड़ा। सबसे ज्यादा खराब स्थिति बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाओं में रही। शहर को छोड़ किसी अन्य शाखा में कैश न होने के चलते भुगतान लगभग शून्य रहा। कमोवेश एटीएम का भी यही हाल रहा।
31 दिसंबर को नोटबंदी के साथ ही साल का अंतिम दिन था। पहली जनवरी को रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को बैंक शाखाएं खुलीं। हालांकि बैंकों में पहले जैसी भीड़ नहीं दिखी लेकिन लोगों को बैंकों से मनचाहा भुगतान अभी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहर की स्थिति ठीक है। व्यापारियों से धनराशि जमा होने के कारण ग्राहकों को 10 से 24 हजार तक भुगतान मिल रहा है लेकिन गांव में लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि बैंकों में नकदी निकालने वालों के साथ जमा करने वाले भी थे जो अब नहीं है इसलिए बैंकों में भीड़ कम दिख रही है। सोमवार को बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाओं में नकदी न होने से दिक्कत रही।