पूरे बरसात कुंभकर्णी नींद सोने वाले शारदा सागर खंड को भी अब अपने शारदा पर बने सनेड़ी तटबंध बचाने की याद आई है। अभियंताओं ने शारदा नदी किनारे बोरों में रेत भरकर कटर बनाने का कार्य शुरू किया है।
शारदा नदी पर बना सनेड़ी तटबंध बाढ़ के दौरान भू-कटान रोकने में बेहद कारगर है। इस तटबंध पर भू-कटान रोकने को दर्जनों पत्थर की ठोकरें बनी हैं। शारदा ने गत वर्ष दो ठोकरों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। माना जा रहा था कि बरसात बाद इन ठोकरों को मजबूती से बनाया जाएगा, लेकिन पूरे वर्ष शारदा सागर के अभियंताओं ने कोई कार्य नहीं कराया। जब बरसात का सीजन शुरू हुआ तो मात्र दोनों स्परों के आगे नोज पर हौचपौच में रेत भरे बोरे लगा दिए गए। जिनका अधिकांश भाग नदी की भेंट चढ़ गया। वहीं पूरे साल अभियंता बजट न होने का बहाना बनाकर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। इधर अब जब बरसात का कार्यकाल लगभग समाप्त होने को है। ऐसे में अब शारदा खंड की कुंभकर्णी नींद खुली है। अभियंताओं ने नलडेंगा में बोरों में रेत भरकर अब कटर बनाने का कार्य शुरू कराया है। बताते हैं कि यह कार्य अभियंता व ठेकेदार की गैर मौजूदगी में ही शुरू कराया गया है। ऐसे में मजदूर भी बोरों में कम मात्रा में रेत भरकर उनको बेतरतीब ढंग से लगाने में जुटे हैं। मात्र कटर के ऊपरी भाग को सहीं से बनाकर यह दर्शाया जा रहा हैं कि कटर सहीं बने हैं। बरसात के अंतिम दिनों में कटर बनाए जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। इधर बाढ़ खंड ने जलस्तर में गिरावट आने के बाद स्पर संख्या छह पर कराए जा रहे मरम्मत कार्य को फिलहाल रोक दिया है।
दूसरे दिन भी नहीं निकाला गया सिल्ट
पूरनपुर। राणा प्रतापनगर को बाढ़ से बचाने को शारदा नदी के दूसरे किनारे पर विरोध के चलते दूसरे दिन भी नदी में सिल्ट सफाई का कार्य नहीं हो सका। हालांकि कार्य में लगे मजदूरों और अन्य लोगों ने बाढ़ से क्षेत्र को बचाने को वृक्षों की टहनियों को काटकर नदी किनारे पर लगाया। शारदा नदी ट्रांस शारदा क्षेत्र के राणा प्रतापनगर मेें पिछले कई दिनों से कटान कर रही है।
कटान रोकने को नदी के दूसरी ओर गांव राहुलनगर के समीप नदी में सिल्ट सफाई का निर्णय लिया गया था। बृहस्पतिवार को इसके लिए कई मजदूर पहुंचे थे, लेकिन चंदिया हजारा, राहुलनगर, ढक्काचांट आदि गांव के एकत्र हुए लोगों ने इसका विरोध किया। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि सिल्ट सफाई से नदी का रुख उनके गांव की ओर हो जाएगा। इससे सिल्ट सफाई किसी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। समस्या को लेकर बृहस्पतिवार शाम को मौके पर पहुंचे एसडीएम जेबी सिंह ने विरोध कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया। शुक्रवार को दूसरे दिन भी लोग विरोध पर डटे रहे। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि पिछले आठ साल से नदी के इस ओर बाढ़ से बचाने को कोई प्रयास नहीं हुए है। उन लोगों ने आपसी सहयोग कर नदी कटान न करें। इसके प्रयास किए है। दूसरे दिन विरोध के चलते नदी की सिल्ट सफाई नहीं हो सकी। हालांकि कार्य में लगे लोगों ने वृक्षों की टहनियों को नदी किनारे लगाया।