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शारदा में समा गया रमनगरा बुझिया गांव

Wed, 10 Aug 2016 11:30 PM IST
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
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कटान - फोटो : पीलीभीत, उत्तर प्रदेश
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 शारदा ने बुधवार को रमनगरा बुझिया गांव का अस्तित्व खत्म कर दिया। यह गांव कई सालों से शारदा के कटान की मार झेल रहा था। इस साल शुरू हुए कटान के दौरान गांव के लोगों ने बचाव कार्यों के लिए आवाज भी उठाई लेकिन अफसरों ने उस पर तबज्जो नहीं दी। लिहाजा गांव में बचे लगभग 40 घर एक-एक कर नदी में समाते चले गए। अब यहां गांव नामोनिशान ही नहीं है। यहां के लोग शारदा डैम के किनारे शरण लिए हुए हैं। डैम के वर्जित क्षेत्र में बसे होने के चलते उन्हें कभी भी हटाया जा सकता है। 
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रमनगरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला रमनगरा बुझिया गांव करीब 55 साल पहले बसाया गया था। उस दौरान लगभग 65 परिवार यहां आकर बसे थे। इनमें कुछ बंगाली और कुछ सिख थे। बसने के कुछ साल बाद पूर्व प्रधान डॉ. विशंभर मंडल ने नौ ग्रामीणों के लिए सवा तीन एकड़ जमीन के हिसाब से पट्टे किए थे। वर्ष 2004 में पूर्व प्रधान रामदरस ने 42 लोगों को दो-दो एकड़ कृषि भूमि के पट्टे किए। शेष परिवार अपंजीकृत बंगाली होने के चलते पट्टे नहीं पा सके, लेकिन जिस भूमि पर उनका कब्जा था, उस पर वे खेती करते रहे।

बरसों से झेल रहे थे बाढ़ का दंश
रमनगरा बुझिया के लोग यूं तो बाढ़ का दंश कई सालों से झेल रहे थे, लेकिन दो साल पहले शारदा ने कहर बरपाते हुए लगभग 22 परिवारों के आवास और करीब 150 एकड़ कृषि भूमि निगल ली। पिछले साल नदी ने मेहरबानी की। उसने यह जमीन छोड़ दी, लेकिन बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त आधे परिवार शारदा डैम पर जाकर अस्थाई रूप से बस गए। नदी ने जमीन छोड़ी तो यह लोग फिर यहां आकर रहने लगे। उस दौरान राजस्व विभाग ने बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा भी दिया था।
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नदी का रुख भांपकर अफसरों से लगाई थी गुहार
वर्तमान में इस गांव में करीब 40 परिवार बसे थे। इनमें करीब 25 परिवारों के पास इंदिरा आवास थे। बाकी छप्परदार घरों में रह रहे थे। बरसात के दौरान नदी का रुख भांपकर यहां के लोगों ने कटान से पहले ही बाढ़ खंड के अफसरों से बचाव कार्य कराने की गुहार लगाई थी, लेकिन अफसरों ने उनकी बात पर तबज्जो नहीं दी। इसके बाद पांच दिन बाद ही नदी ने गांव को निशाना बनाकर उसका बजूद मिटाना शुरू कर दिया।

एक-एक उजड़ते गए घर
शारदा नदी का कहर देख गांव के लोग बुरी तरह से सहम गए थे। नदी ने 25 दिन पहले ही घरों और फसलों को निगलना शुरू कर दिया था। तभी ग्रामीणों ने गांव छोड़ने का फैसला कर लिया। निर्मल, विमल, रमेश, संजीव राय, वीरेंद्र विश्वास, भवानी राय, परेश मंडल, ज्ञानेंद्र, प्रकाश, ठाकुर विश्वास, रम्मन, आजम अंसारी आदि ग्रामीणों ने खुद ही अपने घरों को तोड़कर ईंटें, खिड़की, दरवाजे निकाल लिए और सारा सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया, लेकिन जो राहत मिलने का इंतजार कर रहे थे, उनका सब कुछ नदी अपने साथ बहा ले गई।

उम्मीद टूटी तो तोड़ना पड़े आखिरी घर
गांव के ज्ञानेंद्र और अशोक राय समेत कुछ लोगों के घर ही बचे थे। इन सभी को उम्मीद थी कि नदी का कहर कुछ दिन में थम जाएगा लेकिन उम्मीद ने साथ छोड़ दिया। छह दिन पहले इन सभी को भी अपने घर तोड़कर सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। जिस जगह पर उनके घर बने थे, वह जमीन बुधवार को नदी में समा गई। नदी ने गांव में रह रहे 40 परिवारों के घर और उनकी करीब कृषि फसलों समेत 250 एकड़ जमीन निगल ली। इसी के साथ इस गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। 

अस्थाई ठिकानों पर प्रशासन की मार का खतरा
यहां के अधिकांश बाढ़ पीड़ित शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में अस्थाई रूप से झोपड़ियां डालकर रह रहे हैं, लेकिन इनको यहां से भी हटना पड़ सकता है। वर्जित क्षेत्र में रहने के चलते सिंचाई विभाग इन्हें कभी भी हटा सकता है। इन लोगों का कहना है कि प्रशासन शारदा डैम से हटाकर अन्यत्र कहीं बसा दे, ताकि कृषि भूमि का पट्टा मिल जाए तो बच्चों का पालन पोषण कर सकें।

बाढ़ पीड़ितों का दर्द   
10 पीबीटीपी 19,20,21 
बाढ़ पीड़ित निर्मल विश्वास कहते हैं कि कभी सोचा भी नहीं था कि शारदा एक दिन यहां तक आ पहुंचेगी। नदी उनका सब कुछ निगल लेगी। हम लोग अपनी आंखों से अपनी बर्बादी का मंजर देखते रहे। अपना सबकुछ गवां बैठे रतन मंडल बताते हैं कि शारदा नदी ने जब गुन्हान और बिजौरीखुर्द में पिछले सालों में कटान किया था, तो बाढ़ का पानी तो पूरे इलाके में आ गया था, लेकिन उस समय घर बच गए थे, लेकिन दो सालों से उजड़ना-बसना ही हमारी किस्मत बन गई थी। पट्टे पर मिली सवा तीन एकड़ जमीन गंवा चुके निरंजन सिंह कहते हैं कि रमनगरा और बुझिया को बचाने के लिए सिख संगत ने बहुत प्रयास किया, लेकिन प्रकृति के आगे किसी की नहीं चल पाई। धीरे-धीरे इस गांव का अस्तित्व ही मिट गया। 

जमीनों का सर्वे कार्य जारी
शारदा नदी के कटान से जिसकी जितनी जमीन कटी है, उन सभी का सर्वे किया जा रहा है। लगभग 30 से अधिक लोगों की भूमि का सर्वे कर चुके हैं। इसकी रिपोर्ट रोजाना ही भेजी जा रही है। चूंकि अभी कटान जारी है, इसलिए फाइनल रिपोर्ट बाद में ही भेजी जा सकेगी। 
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- ब्रजेंद्र राना, राजस्व निरीक्षक
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