राोती िबबिलख्ाती केवल प्रसाद के पिररिवार की मिहहिलाएं
टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बाघ के हमलों में आए दिन किसान और मजदूर जान गवां रहे हैं। लोगों का खेत पर जाकर कामकाज करना दूभर हो चुका है। इसका कोई ठोस समाधान करने के बजाए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के गैरजिम्मेदाराना रवैया बराबर दिख रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का विभागीय अफसरों के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है।
शुक्रवार रात को काफी तलाशने के बाद ग्रामीणों ने केवल प्रसाद का शव जंगल के भीतर से क्षतविक्षत हालत में बरामद किया। इसके बाद बाघ के हमले में मजदूर की मौत होने की सूचना फोन पर वनविभाग के कर्मचारियों को दी गई। आरोप है कि इसको सुनने के बाद वनकर्मी बिल्कुल गंभीर नहीं दिखाई दिए। बेशर्म बोल जारी रखते हुए रात में न आने की बात कह डाली। काफी आग्रह करने के बाद भी एक न सुनी और फोन काट दिया गया। जिसके बाद पहले से जमा गांव के सैकड़ों लोग आक्रोशित होना शुरू हो गए। जिनको मौके पर पहुंचे सीओ सदर धर्म सिंह मार्छाल और एसएचओ जसपाल सिंह ग्वाल ने किसी तरह समझा बुझाकर शांत कराया। रात में ही शव को शंाति व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से पोस्टमार्टम हाउस पर भेज दिया गया। रात भर अंजान बने रहने के बाद शनिवार सुबह डीएफओ कैलाश प्रकाश टीम के साथ गांव पहुंचे। गांव के लोगों का कहना है कि मौके पर कुछ देर मुआयना करने के बाद वह भी लौट गए। यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी खुद का बचाव करने के लिए केवल प्रसाद के जंगल के भीतर जाने के बाद हमला होने की बात मनवाने पर बल देते रहे। उधर, खास बात रही कि अधिकांश ग्रामीणों को तो गांव में वनविभाग के अधिकारियों का ही पता नहीं लग सका। जिससे विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई का खुद ही आंकलन किया जा सकता है।