देवहा, शारदा के निशाने पर कई गांव
बुधवार को हुई मामूली बारिश के बाद से एक बार फिर जिले के कई गांवों के लोगों को बाढ़ और कटान का जहां डर सताने लगा है। बाढ़ खंड महकमे ने बरसात पूर्व बचाव कार्य कराने के लिए करोड़ों की लागत की परियोजनाएं भी बनाई हैं, लेकिन धन आवंटन न होने के कारण छह परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका है। यदि बरसात पूर्व बचाव कार्य शुरू नहीं हो सके तो कई गांवों की आबादी के साथ नदी के तटबंधों को कटान से बचा पाना मुश्किल हो सकता है।
नदी के मुहाने पर प्यास गौटिया गांव
शहर विधान सभा क्षेत्र के ग्राम प्यास गौटिया के वाशिंदे बुधवार हुई हल्की बूंदाबादी के बाद से सहम गए हैं। शहर से सटे इस गांव की आबादी को देवहा नदी के कटान से खतरा है। पिछले साल देवहा नदी ने गांव को जाने वाली अधिकांश सड़क को लीलने के बाद कुछ घरों को भी अपने आगोश में ले लिया था। बाढ़ खंड पूरनपुर के अधिशाषी अभियंता मिन्हाज अहमद ने बुधवार यहां का दौरा कर वहां धन की प्रत्याशा में कराए गए बचाव कार्य का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि विभाग ने इसे अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखने के साथ गांव की आबादी को बचाने के लिए काफी कार्य करा दिया है। कुछ धन मिला था। अभी 230 लाख रुपये कार्य के सापेक्ष की मांग का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि महकमे का प्रयास होगा कि इस साल नदी गांव का कटान न कर सके। इसके लिए यहां 16 अदद जीईओ बैग स्पर बनाए गए हैं।
क्षतिग्रस्त स्परों की मरम्मत को हुआ काम
जिले की पूरनपुर तहसील के सबसे अधिक गांव बाढ़-कटान से प्रभावित रहते हैं। माधोटांडा क्षेत्र के ग्राम गुन्हान, नगरिया खुर्द, रमनगरा, बिजौरी खुर्द समेत कई गांव शारदा के कटान के चलते कई साल पहले नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। पीड़ित परिवारों को दूसरे स्थानों पर बसाने की व्यवस्था प्रशासन आज तक नहीं कर सका। यह लोग जहां तहां झोपड़ पट्टी डाल गुजर बसर कर रहे थे। अब नदी इनके खेत और आबादी की ओर कटान करते बढ़ रही है। यहां पूर्व में कटान रोकने को बनाए गए मार्जिनल बंध की सुरक्षा के लिए जीईओ बैग की सहायता से स्पर बनाने का काम है। विभाग ने इसके लिए 309 लाख रुपये की डिमांड शासन को भेजी है। इसके अलावा भारत-नेपाल सीमा से कंबोज नगर क्षेत्र में तीन किमी तक बचाव कार्य कराए गए हैं। इसके लिए 116 लाख की डिमांड शासन को भेजी गई है।