शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से शारदा डैम की सुरक्षा को बनाए गए स्पर नौ सी का अगला हिस्सा पानी में बह गया। जिससे शारदा डैम के अस्तित्व पर एक बार संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मालूम हो कि ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में बने इस स्पर के कटने से कुछ वर्ष पूर्व कई कालोनियों की आबादी का क्षेत्र व कृषि भूमि नदी में समा गई थी।
प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों को सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या कराने वाले शारदा डैम को बनाते समय शारदा नदी से उत्पन्न खतरे को भांप कर नदी किनारे मार्जनल बांध व स्पर बनाए गए थे। उसी में ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में एक स्पर नौ सी (वर्तमान में अब स्पर नंबर छह) बनाया गया था। यह स्पर देखरेख के अभाव में कुछ पूर्व बह गया था। उस दौरान स्पर कटने से क्षेत्र के रमनगरा, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, गुन्हान, बिजौरी खुर्दकलां की आबादी का क्षेत्र व कृषि भूमि शारदा में समा गई थी। जिसके बाद पुन: पत्थर का ही स्पर बनाया गया था। जो आज भी है। स्पर की नोज (अगला हिस्सा) हर साल क्षतिग्रस्त होने के डर से बैग में रेत भर ठोकरें बनाई जाती है। इस बार बाढ़ खंड ने इस इलाके में कटान रोकने को करोड़ों रुपया खर्च किया। जिसमें स्पर संख्या छह की नोज को भी जियो बैग से मजबूत करने की बात कही गई थी, लेकिन बेतरतीब ढंग से लगे जियो बैग का यह नतीजा निकला कि एक दिन पूर्व शारदा का जलस्तर बढ़ा तो छह नंबर स्पर की नोज के सामने लगाए गए जियो बैग नदी की भेट चढ़ गए। गनीमत यह रही कि एक तो बाढ़ नहीं आई, दूसरे जो जल स्तर बढा वह दो घंटे में ही घट गया। अब अभियंता बचाव में बांस व झाड़ झंकाड़ डलवा रहे हैं। वहीं कुछ बैगों में रेत भरकर डलवाई जा रही हैं, लेकिन अभी बाढ़ आने से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में यदि इस स्पर की मजबूती को लेकर विभाग ज्यादा गंभीर नहीं हुआ तो शारदा डैम के अस्तित्व को भी खतरा हो सकता है।