पीलीभीत। माला रेंज में चीतलों के शिकार की घटना के बाद वन कर्मियों की संलिप्तता सामने आने पर अफसर गंभीर हुए हैं। डीएफओ मनीष सिंह ने प्रकरण की जांच एसडीओ रमेश चौहान को सौंपी है। जांच में कई वन कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटकने की बात कही जा रही है।
बीते शुक्रवार को पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला रेंज कार्यालय से एक किमी दायरे में रात साढ़े दस बजे मुख्य मार्ग के निकट बाइक से पहुंचे शिकारियों ने दो चीतलों का शिकार किया था। इसके अगले दिन शनिवार सुबह कांबिंग के दौरान शिकारी वनकर्मी की बंदूक भी छीन ले गए थे।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमों ने प्रयास कर घटना में शामिल छह शिकारियों को रविवार रात जंगल क्षेत्र से मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। उसमें एक पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल मंसूर खां भी शामिल था। पूछताछ में वन कर्मियों की संलिप्तता सामने आई थी।
जिसको अफसरों ने गंभीरता से लेकर जांच शुरू कराई है। सामने आया है कि शिकारियों ने पूर्व में भी शिकार की घटनाओं को अंजाम दिया था। इसके अलावा भी कई अहम जानकारियां पता चली हैं। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि शिकार की घटना में वन कर्मियों की संलिप्तता को लेकर एसडीओ को जांच सौंपी है।
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पकड़े गए एक शिकारी का जंगल से रहा है पुराना जुड़ाव
शिकार की घटना में पकड़े गए छह शिकारियों में एक शिकारी उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के थाना धनकुईया के गांव बग्गा चौव्वन निवासी अब्दुल हकीम का जंगल से पुराना जुड़ाव रहा है। बताया जाता है कि उसके वन अफसरों से लेकर वन कर्मियों तक अच्छे संपर्क रहे हैं। पूर्व में जंगल में घास आदि का ठेका लेने वाले ठेकेदारों के साथ भी उसका पीटीआर के जंगल में आना-जाना लगा रहता था। उसे जंगल के अधिकतर हिस्सों के बारे में जानकारी थी।