पीलीभीत। किसान बनकर मंडी समिति स्थित क्रय केंद्र पर धान बेचने पहुंचे दो बिचौलियों को एसडीएम ने पकड़ लिया। सवाल करने पर पहले तो बिचौलिये गुमराह करने की कोशिश करते रहे, मगर सख्ती हुई तो पोल खुलती चली गई। दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर बिचौलियों को जेल भेज दिया गया है। साथ ही क्रय केंद्र प्रभारियों को धान खरीद करते वक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई थी। पहले जनपद भर में 165 क्रय केंद्र खोले गए थे। मगर प्रशासन ने सख्ती की तो स्टाफ, संसाधन और आर्थिक दिक्कत का हवाला देकर कई एजेंसियों ने क्रय केंद्र बंद कर दिए थे। 115 क्रय केंद्र रह गए थे। मगर बीते दिनों 20 अन्य क्रय केंद्र भी बंद हो गए और संख्या 95 रह गई है। अधिकांश ने आर्थिक दिक्कत का हवाला दिया, जबकि एफसीआई ने गोदाम में कर्मचारियों की जरूरत बताकर केंद्र बंद कर दिए थे। अभी तक खरीद 27 लाख क्विंटल हो चुकी है, जबकि लक्ष्य साढ़े 32 लाख क्विंटल है। बंद हुए क्रय केंद्रों पर पड़ा धान अन्य सेंटरों पर तौल कराने की व्यवस्था प्रशासन करा रहा है। उधर, शासन ने भी रिपोर्ट मांगी है कि जनपद में कितने क्षेत्रफल में धान उगाया गया और कितना बिक चुका है। इसी बीच बिचौलियों के सक्रिय होने की भी बात लगातार सामने आ रही थी। इसे देखते हुए डीएम पुलकित खरे ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
एसडीएम सदर अविनाश चंद्र मौर्य शनिवार को मंडी समिति का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। इसी बीच धान बेचने आए अमरिया तहसील क्षेत्र के गांव नवादाकंजा निवासी जगदीश प्रसाद पुत्र तुलाराम से अफसरों ने बात की। पूछे गए सवालों का संतोषजनक जवाब न मिलने पर शक गहराया। पूछताछ करने पर कुछ ही देर में उसके बिचौलिया होने का पता लग गया। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। फिर अफसर आगे बढ़े और रूपपुर कमालु निवासी संजय कुमार पुत्र कन्हाई लाल से बात की। वह भी किसान बनकर दूसरे का धान बेचने की कोशिश कर रहा था। उसे भी पकड़ लिया गया। डीएम ने बताया कि दोनों बिचौलियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्हें जेल भेजा गया है। समस्त केंद्र प्रभारियों को धान खरीद से पूर्व पूछताछ करने और संदेह होने पर गहनता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।