पीलीभीत। दो करोड़ से अधिक का घोटाला करने में फंसे ग्राम विकास अधिकारी पर तीन साल बाद भी कार्रवाई न करने का आरोप कुछ अधिकारियों पर लगा है। पुलिस की विवेचना अब तक पूरा न होने और रिकवरी की कार्रवाई न होने पर मामला दबाने की बात कही जा रही है। अब डीएम ने सीडीओ से पूरे मामले की जानकारी तलब की है।
एक ग्राम विकास अधिकारी पर साल 2018 में हजारा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। 500 से अधिक शौचालयों और प्रधानमंत्री आवास की रकम का घोटाला करने का आरोप लगा था। यह घोटाला दो करोड़ से अधिक का था। कुछ दिन निलंबित रहने के बाद ग्राम विकास अधिकारी को बहाल कर दिया था। बीते दिनों शासन स्तर से भी ग्राम विकास अधिकारी की सेवा पुस्तिका की प्रति डीडीओ से तलब की गई थी। इस पूरे मामले में तीन साल बाद भी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।
बीते दिनों एक बर्खास्त सचिव ने भी विकास भवन में ग्राम विकास अधिकारी को बचाने का आरोप कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाते हुए धरना प्रदर्शन किया था। इसके अलावा कुछ शिकायतें भी पहुंची थीं। मगर इसके बाद फिर से कार्रवाई दबा दी गई है। मामले में विकास विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं पुलिस की विवेचना भी पूरी नहीं हो सकी है, जबकि मामला दो करोड़ से अधिक के सरकारी गबन का है। डीएम पुलकित खरे ने बताया कि सीडीओ से पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी गई है। अगर कहीं लापरवाही मिलती है, तो सख्त कार्रवाई होगी।