पीलीभीत। निजी फर्म बनाकर मनरेगा में घोटाला करने वाले रोजगार सेवक और तकनीकी सहायकों पर डीएम की सख्त हिदायत के बाद भी निचले स्तर पर अधिकारी खेल करने से बाज नहीं आ रहे। पहले से संरक्षण देने के आरोप में घिरे कुछ अफसरों ने कई दिनों की टालमटोल के बाद कानूनी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई। सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे कहावत को चरितार्थ करते हुए अफसरों के निर्देश का पालन भी कर दिया और फर्म बनाकर फंसे जिम्मेदारों की मदद भी कर गए। तकनीकी सहायकों पर डीएम के आदेश के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। शासनादेश का हवाला देकर टाल दिया गया है। वहीं रोजगार सेवक पर दर्ज रिपोर्ट भी सवाल खड़े कर रही है। इसे सीधे तौर पर फर्म चलाने वाले जिम्मेदार और अफसरों के बीच तालमेल से जोड़कर देखा जा रहा है।
अमरिया के एपीओ और तीन रोजगार सेवकों का मनरेगा में करोड़ों का घोटाला करने का मामला उजागर होने के बाद डीएम पुलकित खरे ने अन्य ब्लॉकों पर हुए मनरेगा कार्यों की जांच शुरू कराई थी। इसी दौरान मिली एक शिकायत पर डीडीओ से जांच कराई गई तो माधोटांडा के रोजगार सेवक इस्लामुद्दीन और पूरनपुर के दो तकनीकी सहायकों की फर्में चलती मिली थीं। तीनों को बर्खास्त कर दिया गया। फर्म काली सूची में डाल दी गई। एफआईआर के आदेश भी डीएम ने कर दिए गए थे, मगर निचले स्तर पर अधिकारी फर्म बनाने वालों पर मेहरबान थे। शुरुआत से चर्चा थी कि कुछ अफसर विभागीय कार्रवाई कर तीनों पर एफआईआर न कराने की कोशिश कर रहे हैं। इस चर्चा को तब और बल मिला जब एफआईआर कराने से हाथ खींचे जाने लगे। तकनीकी सहायकों पर बर्खास्तगी के एक सप्ताह बाद भी अभी तक रिपोर्ट नहीं कराई गई है। इसे लेकर मुख्यालय के अफसर बीडीओ पूरनपुर पर टाल रहे हैं, जबकि बीडीओ पूरनपुर ने तो नियमों का हवाला देते हुए नया पेच फंसा दिया। नियुक्ति करने वाले अधिकारी की तरफ से रिपोर्ट लिखाने की बात कहकर पीछे हट गए हैं। अभी तक तहरीर तक नहीं दी गई है। उधर एक दिन पूर्व रोजगार सेवक पर माधोटांडा में सचिव की ओर से लिखाई गई रिपोर्ट पर भी सवाल उठ गए हैं। मामला मनरेगा में नियम विरुद्ध तरीके से फर्म बनाकर लेनदेन से जुड़ा था, फिर भी मामूली धारा में रिपोर्ट लिखाई गई। तहरीर देने वाले से लेकर पुलिस तक इस एफआईआर को लेकर घिर गई है। सवाल यह है कि क्या इस बार कार्रवाई से पूर्व विधिक राय तक नहीं ली गई।
सचिव की ओर से दी गई तहरीर भी अधूरी
अगस्त 2020 में अमरिया के एपीओ और तीन रोजगार सेवक पर लिखाई गई रिपोर्ट में भी शुरूआत में तहरीर में गलतियां कर दी गई थी। चूंकि उस प्रकरण में सीधे शासन की नजर थी तो अफसरों ने समय रहते सुधार करा लिया था। मगर शनिवार को दी गई तहरीर देखकर ही सवाल उठ गए। सचिव की ओर से दी तहरीर में सिर्फ यही कहा गया कि शिकायत पर अफसरों ने जांच की तो नियम विरुद्ध तरीके से फर्म बनी पाई गई। यह क्यों बनाई गई, इसे बनाकर किस तरह से मनरेगा में खेल किया गया। काफी कम शब्दों में आधी अधूरी जानकारी के साथ तहरीर दी गई। उधर, पुलिस ने भी सिर्फ धारा 168 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली, जबकि यह मामला भी अगस्त में सामने आए एपीओ की तर्ज पर ही था। फिर धाराओं में इतना अंतर कैसे, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।
विशेषज्ञ बोले- धोखाधड़ी समेत कई धाराएं लगनी चाहिए
रोजगार सेवक पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट को लेकर विधि विशेषज्ञों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि धारा 168 सामान्य धारा है। कोई लोक सेवक होते हुए व्यापार में लगेगा। उसके लिए यह धारा है। इसके तहत सिर्फ एक वर्ष तक कारावास, जुर्माना या फिर दोनों के दंड का प्रावधान है। जबकि धनलाभ के लिए फर्म बनाकर इस्तेमाल की गई। उसे अधिकारियों से छिपाकर चलाया। ऐसे में धोखाधड़ी समेत कई अन्य संगीन धाराएं जिनकी सजा सात साल या फिर उससे अधिक है। यह भी लगानी चाहिए थी।
बीडीओ का तो अपना अलग ही तर्क
पूरनपुर बीडीओ सुनील जायसवाल का इस पूरे मामले में अपना तर्क है। उनका कहना है कि शासनादेश के अनुसार नियुक्ति प्राधिकरण अधिकारी को ही रिपोर्ट दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त है। अगर कोई अन्य रिपोर्ट दर्ज कराता भी है तो न्यायालय में मामला पहुंचने पर दिक्कत होती है। इसके लिए अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। फिर भी अगर अधिकारी कहेंगे तो बर्खास्त किए गए तकनीकी सहायकों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। हालांकि उन्हीं के क्षेत्र में रोजगार सेवक पर फिर सचिव से तहरीर क्यों दिलाई गई, इसका जवाब नहीं दे पाए।
कहीं बचाने के लिए नहीं कर रहे खेल
प्रकरण में रोजगार सेवक और तकनीकी सहायकों को जांच पूरी होने के बाद कुछ अफसर बचाने में लगे थे। यह प्रयास था कि विभागीय दंड दे दिया जाए, लेकिन एफआईआर से बचा दें। मगर डीएम ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाकर रिपोर्ट के आदेश कर दिए थे। अब कानूनी कार्रवाई में राहत देने के पीछे इसी को वजह माना जा रहा है कि अफसर के कहने पर रिपोर्ट भी हुई और बचाव भी कर दिया।
डीएम बोले- बढ़वाई जाएंगी धारा, कोई रियायत नहीं
फर्म बनाकर काम करने का मामला सीधे तौर पर धोखाधड़ी से जुड़ा है। दर्ज एफआईआर में संबंधित अपराध से जुड़ी सभी धाराएं बढ़वाई जाएंगी। तकनीकी सहायकों पर भी एफआईआर दर्ज कराएंगे। अगर किसी को बचाने के उद्देश्य से लापरवाही की गई है, जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गड़बड़ी करने वालों को किसी तरह की रियायत नहीं मिलेगी। - पुलकित खरे, डीएम