सरकारी विभाग जनता से तो बकाया वसूलते हैं मगर खुद कर अदा करने में लापरवाह हैं। शहर में केंद् और राज्य सरकार के 102 विभागों के दफ्तर हैं। इनमें कुछ विभाग तो नगरपालिका को गृह व जल कर का भुगतान कर रहे हैं लेकिन अधिकतर विभाग कर अदायगी में फिसड्डी हैं। नगर पालिका के मुताबिक सरकारी विभागों पर मार्च, 2014 तक करीब 40 लाख रुपये बकाया था, जो अब बढ़कर 50.23 लाख रुपये हो चुका है।
कई सरकारी विभागों पर दो से तीन लाख रुपये तक बकाया है। इस धनराशि को वसूलने के लिए पालिका महज नोटिस देकर ही काम चलाता आ रहा है। इसके उलट आम लोगों से टैक्स या अन्य कोई सरकारी बकाया वसूलने के लिए उनके खिलाफ आरसी जारी करने के अलावा कुर्की तक कर दी जाती है।
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यह हैं हालात
मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय 3,50,969 रुपये
बीएसएनएल 1,73,109 रुपये
मुख्य डाकघर 3,35,400 रुपये
अधिशाषी अभियंता जल निगम 1,55, 463 रुपये
जिला पुरुष चिकित्सालय 1,60,000 रुपये
राजकीय छात्रावास समाज कल्याण 2,18,000 रुपये
सीनियर मार्केटिंग इंसपेक्टर कार्यालय 91,600 रुपये
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज 69,290 रुपये
उपाधि महाविद्यालय 69,600 रुपये
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नगरपालिका द्वारा लगातार वसूली की जा रही है। कर अदायगी न करने वालों को नोटिस भेजा जाता है। सरकारी विभाग भी शासन को पत्र भेजकर ग्रांट मांगते हैं। ग्रांट आने पर बकाया भुगतान कर दिया जाता है।
- नर सिंह राणा, कर निर्धारण अधिकारी, नगरपालिका