स्वास्थ्य विभाग में संविदा कर्मियों की नियुक्तियों को लेकर उठे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। पूर्व सीएमओ ने मिशन निदेशक को पत्र भेजकर डीपीएम (जिला कार्यक्रम प्रबंधक) पर सूची देकर 11 अभ्यर्थियों के चयन का दबाव डालने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत सीएमओ कार्यालय में आठ जनवरी से संविदा पदों पर नियुक्तियों को लेकर साक्षात्कार हुए थे। जिसको लेकर एनएचएम के डीपीएम सर्वेश वर्मा ने मिशन निदेशक को पत्र भेजकर नियम विरुद्ध तरीके से साक्षात्कार प्रक्रिया संपन्न कराने का आरोप लगाया था। पत्र में सीबीआई जांच की भी सिफारिश की गई थी। इधर अब मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
पूर्व सीएमओ अशोक कुमार सिंह ने 31 जनवरी को मिशन निदेशक को पत्र भेजकर डीपीएम पर 11 अभ्यर्थियों की सूची देकर चयन करने का दबाव डालने की बात कही है। पत्र में कहा कि स्टाफ नर्स की साक्षात्कार प्रक्रिया के दौरान डीपीएम ने 11 अभ्यर्थियों की सूची देकर अवैधानिक रुप से दबाव डाला गया, लेकिन श्रेष्ठता क्रम में न आने के चलते सूची में शामिल अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सका।
चयन प्रक्रिया पूरी के होने बाद चयन परिणाम को बदलने को कहा गया, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिसके चलते चयन प्रक्रिया पर अनर्गल आरोप लगाकर प्रकिया निरस्त कराने का प्रयास किया जा रहा है। पत्र में डीपीएम पर अपने एक रिश्तेदार को बिना टैक्सी परमिट वाहन का उपयोग करने, संविदाकर्मियों को धमकाने, गलत तरीके से टाइप फोर आवास आवंटित कराने का भी आरोप लगाया गया है।
पत्र में डीपीएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। उधर डीपीएम ने डीएम और एसपी को पत्र लिखकर बताया है कि पूर्व सीएमओ एके सिंह ने उनसे फोन पर बात की और धमकाया है और उनसे खुद और परिवार को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।
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चयन प्रक्रिया के दौरान डीपीएम द्वारा अभ्यर्थ्यों की सूची देकर अनुचित तरीके से चयन करने का दबाव डाला गया था। चयन न होने के चलते वह प्रक्रिया निरस्त कराने को अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। पूरी प्रक्रिया चयन समिति के समक्ष हुई है।
डॉ. एके सिंह, पूर्व सीएमओ
लिपिकों पर योजनाओं पर घपलेबाजी का आरोप
पीलीभीत। ग्राम चिड़ियादाह निवासी ईश्वरी प्रसाद मौर्य ने केंद्रीय मंत्री को पत्र सौंपकर सीएमओ व एनएचएम पटल का कार्य देख रहे एक लिपिक पर एनआरएचएम का कार्य गैर जनपद में तैनात एक लिपिक से कराने का आरोप लगाया है। पत्र में कहा गया कि दोनों लिपिक द्वारा सरकारी योजनाओं में घपलेबाजी कर लाखों रुपये का गोलमाल किया जा चुका है और कई संपत्तियों की खरीद फरोख्त भी की गई है। पत्र में मामले की जांच कराकर दोनों लिपिकों की चल व अचल संपत्तियों की जांच कराने की मांग की गई है।