पीलीभीत। बासमती धान की फसल के दौरान लगाई जाने वाली 11 कीटनाशक दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। अधिकारी ने बताया कि बासमती के निर्यात में यह कीटनाशक दवाएं बाधा उत्पन्न करती हैं। ऐसे में इनका प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
तराई में काफी किसान धान की पैदावार करते हैं। इसमें बासमती धान का उत्पादन भी किया जा रहा है। बासमती चावल का निर्यात कई जगहों पर किया जा रहा है। निर्यात के दौरान इनमें कीटनाशक दवाओं की पुष्टि होने पर यह दवाएं बाधा बन रहीं हैं। बाहर भेजे जाने वाले चावल का लैबों में परीक्षण किया जाता है।
जहां कीटनाशक दवाओं की पुष्टि होने पर इन्हें वापस कर दिया जाता है। ऐसे में अब शासन स्तर से आदेश आने के बाद बासमती चावल के उत्पादन के दौरान लगाई जाने वाली ट्राइसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफॉस, टेबुकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथॉक्साम, प्रोफेनोफाॅस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वेडाजिम, कार्बाेफ्यूरान आदि दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
शासन से निर्देश मिलने के बाद अफसरों ने स्थानीय आदेश जारी कर जिले के सभी कीटनाशक दवाओं के विक्रेताओं से इन्हें न बेचने को कहा है। निर्देश दिए हैं कि चेकिंग के दौरान अगर किसी भी विक्रेता के पास ये प्रतिबंधित दवाएं मिलती हैं तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कृषि अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शासन से निर्देश आने के बाद 11 दवाओं को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करा दिया गया है।
ये किए गए हैं प्रतिबंधित
एसीफेट, बुप्रोफेज़िन, क्लोरपाइरीफॉस, प्रोपिकोनाज़ोल, थायमेथोक्सम, प्रोफेनोफॉस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्बेन्डाज़िम, ट्राइसाइक्लाजोल, टेबुकोनाज़ोल और कार्बोफ्यूरॉन।
किसानों को सलाह
- कृषि विशेषज्ञों या अपने नजदीकी कृषि विभाग से संपर्क कर नवीनतम जानकारी और बासमती धान के लिए सुरक्षित कीटनाशकों के बारे में जानकारी लें।
- निर्यात के लिए बासमती की गुणवत्ता बनाए रखने और किसी भी कानूनी समस्या से बचने के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का ही उपयोग करें।