पीलीभीत। बढ़ती आबादी और सड़कों पर अंधाधुंध वाहनों के अलावा कारखानों से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण पहले से ही प्रदूषित है। मगर, आने वाली दिवाली की रात छुटने वाले पटाखों के धुएं से यह प्रदूषण कई गुना बढ़ने का खतरा है। कोरोना के दौर में हवा में प्रदूषण का बढ़ना इंसान ही नहीं, जीव जंतुओं के जीवन के लिए भी खतरनाक हो सकता है। कोरोना के दौर में पटाखे या आतिशबाजी छुड़ाने से जितना बचा जाए, उतना ही अच्छा है।
दिवाली में दीये की रोशनी पूरा वातावरण रोशन करती है। मगर, पटाखे हवा में प्रदूषण की मात्रा कई गुना बढ़ा देते हैं। कुछ पल की खुशी और पैसे के दिखावे के आगे तमाम लोग हर साल बढ़ते प्रदूषण से आंखें मूंदे रहते हैं। उन्हें शायद यह पता नहीं होता कि वह पटाखे और आतिशबाजी जलाकर अपने आसपास ही नहीं बल्कि पूरे वायुमंडल में प्रदूषण का जहर घोलते हैं। इस बार तो कोरोना का दौर है। कोरोना हवा में ही तेजी से फैलता है। अगर पर्यावरण प्रदूषित होगा तो कोरोना भी उतनी तेजी से ही फैलकर संपूर्ण मानव जाति को नुकसान पहुंचा सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा समाज के बुद्धजीवी भी इसे लेकर आम लोगों को आगाह करने में जुटे हैं। अमर उजाला ने एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध..मुहिम छेड़कर समाज को उससे जोड़ा है।
खतरे में पड़ सकता है मानव जीवन
दिवाली पर पटाखों और आतिशबाजी का शोर कान के लिए पहले से खतरनाक है। आतिशबाजी और पटाखे छुड़ाने के शौकीन तुरंत इस बात को अनदेखा कर देते हैं कि उससे पर्यावरण को नुकसान होगा। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि तेज आवाज वाले धमाकेदार पटाखों की आवाज और उससे निकलने वाली जहरीली गैसें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए बेहद नुकसानदायक है। यह किसी की भी जिंदगी खतरे में डाल सकती है। इस बार भी शौकीन पटाखे और आतिशबाजी छुड़ाने के लिए दिवाली के दिन का इंतजार कर रहे हैं। इधर, विशेषज्ञों प्रदूषण बढ़ने पर कोरोना के घातक होने का अंदेशा जताया है। उनका कहना है कि हानिकारक पटाखों के न छुड़ाने के अभियान हर साल चलते हैं। प्रदूषण रहित दिवाली मनाने का असर भी देखने को मिलता है। मगर पटाखे या आतिशबाजी न छुड़ाने के लिए प्रत्येक नागरिक को आगे आना होगा। तभी इससे बचा सकता है।
पटाखों की रकम से बेरोजगारों की मदद करें
रंगबिरंगी आतिशबाजी निश्चित रूप से खुशियों का प्रतीक है, मगर यह खुशियां पर्यावरण को दूषित करती हैं। कोरोना काल में दिवाली की खुशियां मनाने के लिए हम आतिशबाजी या पटाखों पर रुपये खर्च करने के बजाय ऐसे लोगों की मदद करें, जो लॉकडाउन में अपनी नौकरी गंवा बैठे हैं। - डॉ. नरेंद्र कुमार बतरा, प्रवक्ता, रामलुभाई साहनी महिला महाविद्यालय
जरूरतमंदों को अपनी खुशियों में शामिल करें
दिवाली अपने साथ बहुत सारी खुशियां लेकर आती है, मगर हानिकारक पटाखों मेें मौजूद छोटे कण सेहत पर बुरा असर डालते हैं। उसका असर फेफड़ों पर पड़ता है और हालात यहां तक भी पहुंच सकते हैं कि आर्गन फेल और मौत तक हो सकती है। बेहतर होगा कि सभी मिलकर प्रदूषण रहित दिवाली मनाएं। उन जरूरतमंदों को खुशियों में शामिल करें, जो आर्थिक रूसे कमजोर हैं। - डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल, फिजिशियन
पटाखे न छुड़ाकर सबके घर रोशन करें
दिवाली का त्योहार खुशियां बांटने का है, मगर यह भी सच है कि इस त्योहार पर आतिशबाजी के नाम पर हम अपनों को ही प्रदूषण की गिरफ्त में भेजते हैं। आने वाली पीढ़ी को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। यही अच्छा है कि हम दिवाली पर जरुरतमंदों के घर में भी रोशनी लाएं। उनकी मदद करें। उनमें ही अपनी खुशियों को खोजें। - अजीत बाजपेयी, दवा कारोबारी
प्रत्येक नागरिक प्रदूषण के खतरे पर मंथन करे
दिवाली रंग बिरंगी आतिशबाजी के बिना अधूरी रहती है, मगर हमें अपने भविष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। सामान्य दिनों में जब हम इस कदर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं तो दिवाली पर पटाखों से निकलने वाले धुएं से क्या होगा। उस दिन पर्यावरण किस कदर प्रदूषित होगा, इसका अंदाजा लगाकर प्रत्येक नागरिक को उस पर मंथन करना चाहिए। - अनिल मैनी, कारोबारी