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अब जंगल क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी नहीं बना सकेगा नई सड़कें

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पीलीभीत/माधोटांडा। अब तराईवासियों को ऊबड़ खाबड़ रास्तों से होकर ही जंगल में आवागमन करना होगा। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल क्षेत्र में बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत बनने वाली सड़कों के निर्माण पर रोक लगा दी है। टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर ने पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन को पत्र भेजकर कहा है कि सड़क निर्माण से पूर्व पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति सड़क निर्माण वन अधिनियम का उल्लंघन होगा।
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तराई क्षेत्र में विभिन्न कॉलोनियों में पहुंचने के लिए कुछ वर्ष पहले गन्ना सहित कई विभागों ने संपर्क मार्ग बनाए थे। इन मार्गों के जर्जर होने पर मरम्मत भी कराई जाती थी। इधर बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत कुछ नए संपर्क मार्ग बनाए जाने हैं। इसे लेकर पीडब्ल्यूडी ने सर्वे शुरू किया है। जंगल क्षेत्र में सड़क निर्माण का सर्वे होने की जानकारी वनकर्मियों ने रेंजर को दी। रेंजर ने इसकी जानकारी टाइगर रिजर्व के आला अफसरों को दी। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल क्षेत्र में नए मार्ग निर्माण पर रोक लगा दी। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन को पत्र लिखकर कहा कि जंगल को जून 2014 में टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में संपर्क मार्ग आरक्षित वन क्षेत्र में आ रहे हैं। वन क्षेत्र में किसी भी तरह का गैरवानिकी कार्य कराने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना मंत्रालय की अनुमति से टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र में किसी भी तरह का गैरवानिकी की कार्य करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 एवं वन अधिनियम 1980 का उल्लंघन है। ऐसी दशा में बिना पूर्व अनुमति के आरक्षित वन क्षेत्र में कोई भी गैरवानिकी निर्माण न कराया जाए।
निर्माण अधर में लटका
बार्डर एरिया डेवलपमेंट के तहत सुंदरनगर से बॉर्डर पिलर नंबर 17 तक, सुंदरनगर से वन महोलिया, चूका बाजार से सुतिया नाला, मैनी गुलडिय़ा से सिमरा तालुके महाराजपुर गुरुद्वारा और राजपुर तालुके महाराजपुर से बंधा कॉलोनी तक संपर्क मार्ग निर्माण अधर में लटक गया है।
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टाइगर रिजर्व में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति के बिना जंगल क्षेत्र में गैरवानिकी कार्य करना या कराना वन अधिनियम का उल्लंघन है। लिहाजा बिना अनुमति सड़क निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
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- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर
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