शहर विधायक हाजी रियाज अहमद का मुख्यमंत्री ने एक बार फिर कद बढ़ाया है। अब उन्हें मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। वह शिवपाल सिंह यादव के करीबियों में गिने जाते हैं। साथ ही मुस्लिम मतदाताओं पर उनकी बेहतर पकड़ है।
हाजी रियाज अहमद की गिनती जिले के कद्दावर नेताओं में होती है। उन्होंने राजनीति की शुरुआत मेनका गांधी और अकबर अहमद डंपी के साथ शुरू की थी। मेनका गांधी की पार्टी संजय मंच से उन्होंने पहला चुनाव शहर विधान सभा सीट से वर्ष 1983 में लड़ा और विधायक बने। इसके बाद 1985 में हुए विधान सभा चुनाव में हार गए। 1989 में वह शहर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर विधान सभा पहुंचे। इसके बाद हुए विधान सभा चुनावों में वह लगातार हारते रहे। करीब 12 साल बाद 2002 में हुए विधान सभा चुनाव में वह सपा के टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद वर्ष 2007 और 2012 के विधान सभा चुनाव भी वह सपा के टिकट पर जीते और हैट्रिक बनाई। प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर पहले ही मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें खादी ग्रामोद्योग राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद पांचवें मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री मत्स्य एवं सार्वजनिक उद्यम बनाकर कद बढ़ाया गया। सोमवार को अखिलेश सरकार के आठवें मंत्रिमंडल विस्तार में एक बार फिर हाजी रियाज अहमद का कद बढ़ा। अब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
हाजी रियाज अहमद की गिनती शिवपाल यादव के करीबियों में की जाती है। इससे साफ है कि हाजी रियाज अहमद को कैबिनेट मंत्री बनाकर जहां शिवपाल को खुश करने का काम किया गया है, वहीं सपा रियाज के जरिए मुस्लिम वोट बैंक को और मजबूत करना चाहती है।
पहली बार कोई विधायक बना कैबिनेट मंत्री
पीलीभीत। हाजी रियाज अहमद कैबिनेट मंत्री बनने वाले जिले के पहले विधायक हैं। शहर विधान सभा सीट से 2002 से 2012 तक तीन बार चुनाव जीत जहां उन्होंने हैट्रिक बनाई वहीं अखिलेश सरकार में भी तीसरी बार उनका कद बढ़ाया गया है।