पीलीभीत। दो दिन में रिकॉर्ड 50 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई। गेहूं समेत अन्य रबी फसलों पर इसका खराब असर पड़ेगा। सरसों और लाही की फसलों के अलावा सब्जियों के उत्पादन में कमी आने के आसार बन गए हैं।
मकर संक्रांति के बाद बीते दो दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश ने सर्दी और गलन से तो राहत दी, लेकिन किसानों को नुकसान पहुंचा दिया। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार दो दिन में 50 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इससे अगैती प्रजाति का गेहूं प्रभावित हो सकता है। अगर खेतों में पानी भरा रहा तो गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ना तय है। हालांकि जो गेहूं देरी से बोया गया है, उस पर खास असर नहीं पड़ेगा। मौसम विभाग के अनुसार अभी 23 जनवरी तक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। इस कारण अभी और बारिश हो सकती है। अगर बारिश का आंकड़ा 90 या 100 एमएम तक पहुंचा तो यह सर्दी में बीते पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ेगी। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 16 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह तेज बारिश हुई। दोपहर बाद भी रिमझिम जारी रही। कुछ देर को सूरज चमके, लेकिन थोड़ी देर में ही वह बादलों में छुप गए। इस बारिश से गेहूं के अलावा सरसों, लाही के उत्पादन में 30 से 40 फीसदी तक की कमी आ सकती है। सब्जियों में आलू, पत्ता गोभी, टमाटर, पालक, फूल गोभी, लौकी, सोया और मेथी का उत्पादन घटेगा। अब शनिवार को भी बादल छाए रहेंगे, इससे बूंदाबांदी हो सकती है। रविवार को आसमान साफ रहेगा, हल्की धूप निकलेगी।
आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह के अनुसार दो दिनों की इस बारिश ने लाही और सरसों की खड़ी फसल के लिए नुकसान पहुंचाया है। मटर की फसल को भी ज्यादा पानी से नुकसान होगा, इसकी पत्तियों में डाउनी मिलडायू रोग हो सकता है। आलू की फसल भी अब खुदाई के नजदीक है, ऐसे में बेमौसम बरसात से काफी नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह है कि खेत में बारिश का पानी इकट्ठा न होने दें, तुरंत निकासी की व्यवस्था करें। खासकर सब्जी की फसलों में डाईएथेन -45 का ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करें। जो पौधे झुलसा रोग के कारण खराब हो चुके हैं, उनको खेत से बाहर कर दें।