पीलीभीत। श्रावण मास में जगह-जगह कांवड़ियों के जत्थे रविवार को डीजे की धुन पर शिव भक्ति में लीन नजर आए। गौरीशंकर मंदिर समेत अन्य शिवालयों से कांवड़ियों के जत्थे रवाना हुए। यह कांवड़िये कछला गंगाघाट से जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करेंगे।
सावन भगवान शिव की आराधना का महीना कहा जाता है। इस महीने में खासकर सोमवार के दिन उपवास, पूजा पाठ और रुद्राभिषेक आदि किए जाते हैं। शहर में सवान के दूसरे सोमवार को लेकर रविवार को शिव मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक तैयारियां चलती रहीं। उम्मीद की जा रही है कि शिवालयों में सोमवार को शिवभक्तों की खासी भीड़ रहेगी। रविवार को शहर से कांवड़ियों के कई जत्थे जल लेने के लिए कछला रवाना हुए।
दुश्वारियों के बीच गुजरने को मजबूर हैं कांवड़िये
शहर में ईदगाह रेलवे क्रॉसिंग और असम हाइवे चौराहे से कांवड़ियों के जत्थे आते-जाते हैं। हर साल इन मार्गों को दुरुस्त किया जाता है, लेकिन इस बार मार्ग के गड्ढे भरने के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई है। जो इंतजाम किए गए हैं वे ही कांवड़ियों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। कहीं कांवड़ियों के पैरों में पत्थर चुभते हैं तो कहीं गड्ढों से होकर गुजरना पड़ रहा है।
भगवान भोले नाथ की कृपा है। वरना सड़कें तो ऐसी हैं कि इस पर पैदल चलना मुसीबत को दावत देने जैसा है।
- हिमांशु
शासन-प्रशासन को पता है कि हर साल हजारों कांवड़िये ़यहां से जाते हैं फिर भी उनके जाने आने वाले मार्ग को दुरुस्त नहीं किया जाता।
- शोभित
सड़कों पर पैबंद लगाकर खानापूरी की जाती है। मामूली सी बरसात में ही सड़कों पर गड्ढे हो जाते हैं। अब भी वहीं स्थिति है।
- अमित
सावन शुरू होने से पूर्व ही कांवड़ियों के आने जाने मार्ग और मंदिरों के आसपास व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा चुकी हैं। जहां गड्ढे थे उनको भरवा दिया है और जहां सड़क ज्यादा क्षतिग्रस्त थी उसकी भी मरम्मत करा दी गई है, ताकि कावंड़ियों को कोई दिक्कत न हो।
-विमला जायसवाल, पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका परिषद