अन्नदाता से इस बार विधाता नाराज दिखाई पड़ रहा है। पहले हुई ओलावृष्टि व बारिश से जिले के 1.45 लाख हेक्टेअर में बोई गेहूं व 10530 हेक्टेअर में बोई सरसों की फसल करीब 60 प्रतिशत तक नुकसान हो चुकी है। अब शुक्रवार देर रात से शनिवार भोर तक हुई बारिश ने किसानों की इस फसल के नुकसान के प्रतिशत को और बढ़ा दिया। इस बारिश से हुई क्षति का आंकलन अभी नहीं हुआ है लेकिन उपकृषि निदेशक एके सिंह फसल के पांच से 15 प्रतिशत तक के क्षति के अनुमान की बात कह रहे हैं।
भाकियू के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनजीत सिंह 70-80 फीसदी तक फसल के नुकसान होने का दावा कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कई बार बारिश व ओलावृष्टि की मार झेल चुके गेहूं पतला होने के साथ काला पड़ने लगा है। जिससे बची फसल बेचने में भी उन्हें लाले पड़ेंगे। वहीं सरसों की अधिकांश फसल खेत में झड़ कर जमने तक लगी है। बची फसल पर सूड़ी कीट ने भी हमला बोल दिया है। प्रशासन के सर्वे पर भी सवाल किसान उठा रहे हैं। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक 2.19 लाख किसानों में से आधे से अधिक किसान गेहूं की खेती कर रहे हैं। भाकपा (माले) नेत्री एवं जिपं सदस्य रमा गैरोला का कहना है कि इनमे से करीब 60 फीसदी किसानों की गेहूं की फसल 50 फीसदी से अधिक तक प्रभावित हुई है, लेकिन राजस्व विभाग तीनों तहसीलों में अब तक कुल आठ हजार किसानों को 2.19 करोड़ का मुआवजा वितरित करने का दावा कर रहा है।