पीलीभीत। शादी का झांसा देकर एक महिला से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में अदालत ने एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है। अपर सत्र न्यायाधीश अनु सक्सेना ने आरोपी डालचंद को पंद्रह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
9 दिसंबर 2017 में थाना कोतवाली में यह मामला दर्ज किया गया था। पीड़िता ने अपनी तहरीर में बताया था कि मोहल्ला निवासी डालचंद उसे शादी का झांसा देता रहा। उसने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। आरोपी ने पीड़िता की तस्वीरें भी खींच ली थीं। वह इन तस्वीरों को इंटरनेट पर डालने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालता रहा। पीड़िता ने अपनी इज्जत के डर से किसी को कुछ नहीं बताया। बाद में उसकी शादी दूसरी जगह हो गई। इसके बाद भी डालचंद उसे लगातार धमकी दे रहा था कि वह उसके पति के खिलाफ मामला दर्ज कराए।
पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की थी। मामले की विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके साथ ही पत्रावली में मौजूद सभी साक्ष्यों का अवलोकन किया गया। न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया और उसे दंडित करने का आदेश दिया। संवाद
चेक बाउंस, अर्थदंड की 15 फीसदी राशि जमा न करने पर आरोपी को भेजा जेल
पीलीभीत। चेक बाउंस के एक मामले में न्यायालय के आदेश का पालन न करने पर नेतराम को जेल भेज दिया गया है। नेतराम को निचली अदालत से मिली दोषसिद्धि के खिलाफ अपील में अर्थदंड की 15 फीसदी राशि जमा करनी थी। अपर सत्र न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव ने गैर जमानती वारंट पर गिरफ्तार नेतराम को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया। मामले में अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की गई है।
कोतवाली क्षेत्र के निवासी लालाराम ने वर्ष 2023 में नेतराम के विरुद्ध चेक बाउंस का परिवाद दायर किया था। मामले की सुनवाई के बाद अधीनस्थ न्यायालय ने 16 जनवरी को नेतराम को दोषी ठहराया था। उसे नौ माह के कारावास और 30.50 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। नेतराम ने इस दोषसिद्धि के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की थी।
नेतराम ने अर्थदंड के आदेश पर स्थगन की मांग करते हुए प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर न्यायालय ने उसे अर्थदंड की राशि का 15 फीसदी 60 दिन के भीतर जमा करने का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि में नेतराम ने बीमारी और आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए समय बढ़ाने का अनुरोध किया। न्यायालय ने अंतिम अवसर देते हुए 17 अप्रैल तक राशि जमा करने की मोहलत दी थी।
इसके बाद भी नेतराम ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया। इस पर न्यायालय ने उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। वारंट के अनुपालन में पुलिस ने नेतराम को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। सुनवाई और पत्रावली के अवलोकन के बाद न्यायालय ने माना कि नेतराम आदेश के अनुपालन को लेकर गंभीर नहीं है। इसके बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया गया। संवाद
अनिल हत्याकांड में कॉलोनाइजर और महिला कर्मचारी को हाईकोर्ट से राहत
पीलीभीत। कॉलोनाइजर की कंपनी की छत से अकाउंटेंट का शव लटका मिलने के चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी वेदप्रकाश की नियमित जमानत व सह-आरोपी निधि मिश्रा की अग्रिम जमानत सशर्त मंजूर कर ली है। अदालत ने दोनों को जांच एवं विचारण में सहयोग करने सहित कई शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
मोहल्ला खुदागंज निवासी रामौतार ने थाना कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि 13 फरवरी की सुबह थाना कोतवाली क्षेत्र के देशनगर स्थित शिवनगर कॉलोनी में प्रॉपर्टी डीलर वेदप्रकाश की मधुरवाणी इंफा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की छत के बाहर उनके भाई अनिल का शव फंदे से लटका मिला था। अनिल वर्ष 2018 से कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि घटना से कुछ दिन पहले उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। घटना से पूर्व उसे फोन कर कंपनी बुलाया गया और करीब दो घंटे बाद परिवार को उसके शव के छत से लटकने की सूचना मिली।
वादी का आरोप था कि वेदप्रकाश और कंपनी की महिला कर्मचारी निधि मिश्रा अनिल को प्रताड़ित करते थे। उनके संबंधों की जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी देते थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर वेदप्रकाश को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया था।
वेदप्रकाश ने नियमित जमानत व निधि मिश्रा ने अग्रिम जमानत के लिए जनपद सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार की अदालत में आवेदन किया था, जिन्हें खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली। न्यायमूर्ति समीर जैन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद वेदप्रकाश की नियमित जमानत और निधि मिश्रा की अग्रिम जमानत सशर्त मंजूर कर ली। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है तो अभियोजन पक्ष को नियमित एवं अग्रिम जमानत निरस्त कराने के लिए सक्षम न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगी। संवाद