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Pilibhit News: जमीन की आस में भटक रहे रमनगरा के विस्थापित, केंद्रीय मंत्री से लगाई गुहार

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कलीनगर। बाढ़ में उजड़े रमनगरा गांव के 60 परिवार वर्षों से पुनर्वास और जमीन के मालिकाना हक की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद समाधान नहीं मिल सका। अब प्रधान और बंगाली संगठन के नेताओं के नेतृत्व में प्रभावितों ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात कर न्याय की अपील की है।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र में शारदा डैम की तलहटी में बसे ग्राम रमनगरा के 60 पट्टेदार परिवारों की जिंदगी शारदा नदी की कटान ने उजाड़ दी। इन परिवारों की पूरी जीविका सीमित कृषि भूमि पर आधारित थी। शारदा नदी की तेज धारा के कारण अपने घर-द्वार और खेत-खलिहान सबकुछ खो बैठे। वर्षों पहले आई इस विभीषिका में पूरा गांव नदी की कटान में बह गया।
प्रशासन ने राहत स्वरूप इन परिवारों को नजदीकी शारदा सागर डैम के सीपेज क्षेत्र में बैठाया था। इसके लंबे समय बाद भी आज तक इन प्रभावितों के लिए न कोई स्थायी आवास मिला, न ही वैकल्पिक जमीन का पट्टा। प्रशासनिक सर्वे व निरीक्षण के बाद भी इन विस्थापितों को स्थायी पुनर्वास नहीं मिल पाया। इनकी स्थिति आज भी अत्यंत दयनीय है। न रहने की पक्की व्यवस्था, न मूलभूत सुविधाएं। सरकारी योजनाओं का लाभ भूमि व दस्तावेज न होने के कारण नहीं मिल पा रहा। इस आस में पिछले दिनों मठईया लाल के प्रधान और बंगाली संगठन के नेता शंकर राय ने दिल्ली में केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मुलाकात कर इस विषय को रखा। पत्र देकर कहां कि बाढ़ से बेघर परिवारों को शीघ्र वैकल्पिक भूमि का पट्टा और आवास उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे भी सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस दौरान सुरेश राह भी मौजूद रहे।
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