पीलीभीत। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के दिन शहर की गलियों से लेकर नेपाल सीमा तक कड़ी सुरक्षा रही। जनपद में पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी सतर्क रहे। धर्मस्थलों, चौराहों से लेकर नेपाल सीमा तक विशेष निगरानी रखी गई। निषेधाज्ञा का सख्ती से पालन भी कराया गया। एसपी, एएसपी समेत अन्य अधिकारी देर रात तक पुलिस फोर्स के साथ शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों का भी भ्रमण करते रहे। डीआईजी ने भी शहर का भ्रमण करते हुए हालात परखे। बेवजह घूमने वालों पर सख्ती की गई।
पांच अगस्त को लेकर कई दिनों से पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा को लेकर तैयारी चल रही थीं। पूर्व से चली आ रही रणनीति के तहत 14 जोन और 41 सेक्टर में जनपद को बांटकर सुरक्षा ड्यूटी लगाई गई। श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन का दिन आया तो सड़कों पर पुलिस के सख्त इंतजाम दिखाई भी दिए। मंगलवार आधी रात के बाद ही एसपी जयप्रकाश, एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी, सीओ सिटी प्रवीण मलिक, कोतवाल श्रीकांत द्विवेदी पुलिस बल के साथ सड़कों पर चेकिंग करने निकल गए। सड़क पर बेवजह घूमते मिले युवकों को रोककर उनसे पूछताछ की गई। संतोषजनक जवाब न मिलने पर चालान कर चेतावनी दी गई। रात भर सड़कों पर सायरन की आवाज गूंजती रही।
बुधवार सुबह छह बजे से ही चौराहों, धर्मस्थलों, मुख्य बाजार और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया। दिन भर फोर्स के साथ अधिकारी भ्रमण पर रहे। डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने भी वाहन से घूमकर शहर और ग्रामीण इलाकों के हालात परखे। नेपाल सीमा से सटे माधोटांडा, हजारा के गांव और उत्तराखंड सीमा से सटे अमरिया और मझोला इलाकों में भी सख्ती रही। उत्तराखंड की ओर से आवाजाही करने वालों को पुलिस और एसएसबी के सवालों का संतोषजनक जवाब देने के बाद ही प्रवेश मिल सका। धर्मस्थलों पर भी ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं होने दिए। पहले ही निर्धारित कर दिया गया था कि पांच से अधिक लोग मंदिर पर एक साथ जमा नहीं होंगे। इसका नगरपालिका की ओर से रिक्शों से घोषणा भी कराई गई थी। इसकी सख्ती से निगरानी भी की गई। गलियों में भी पुलिस बल घूमता दिखा तो सख्ती देख लोग भी कम ही बाहर निकले।