फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिश्तों की डोर टूटने न पाए, इसलिए दे दी बहन को किडनी

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। भाई-बहन का रिश्ता ऐसा होता है कि उसे बयां कर पाना मुश्किल है। इस रिश्ते में त्याग, समर्पण का भाव होता है। किसी एक की भी तकलीफ बर्दाश्त नहीं होती। शहर के मैत्री बाग कॉलोनी निवासी अनुपम सक्सेना ने कुछ ऐसी की मिसाल पेश की है। जिन्होंने अपनी बहन की दोनों किडनी खराब होने पर उनकी जिंदगी बचाने के लिए खुद की परवाह नहीं की। उन्होंने एक किडनी डोनेट कर अपनी बहन की जान बचाई। भाई बहन के इस प्रेम की लोग अक्सर चर्चा करते हैं।
विज्ञापन

मैत्री बाग कॉलोनी निवासी सिविल इंजीनियर अनुपम सक्सेना की बहन दीपिका सक्सेना की शादी 20 साल पहले पूरनपुर में हुई थी। करीब पांच साल पहले दीपिका की दोनों किडनी खराब हो गई। काफी इलाज चला लेकिन वह ठीक नहीं हुईं। इस पर अनुपम काफी चिंतित रहने लगे। उन्होंने कई डॉक्टरों से संपर्क किया और इलाज भी कराया। वर्ष 2018 में उन्होंने दिल्ली में एक अस्पताल में बहन को दिखाया। जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की बात कहकर किडनी बदलने की बात कही। इस पर अनुपम ने अपनी एक किडनी देकर उनकी जिंदगी बचाने का सुझाव दिया। हालांकि पहले दीपिका राजी नहीं हुईं। अनुपम ने काफी समझाया तो वह मान गईं। इसके बार सारी प्रक्रियाएं पूरी की गई। डॉक्टरों के सफल ऑपरेशन के बाद दीपिका की जिंदगी बच गई। अनुपम का कहना है कि बहन से बढ़कर उनकी जिंदगी में कुछ नहीं है। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि रक्षाबंधन के दिन उनकी कलाई सूनी रहे। शादी के बाद बहन हर साल घर पर आकर राखी बांधती है। हमारा प्रेम अटूट है।
भाई-बहन के प्रेम से संवर गई जिंदगी
कहते हैं कि अगर प्रेम हो तो सब कुछ हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही शहर के मोहल्ला खकरा निवासी भाई-बहन ने कर दिया। माता-पिता के अचानक निधन के बाद घर की हालत बिगड़ी लेकिन दोनों के बीच अटूट प्रेम और संघर्ष से कुछ दिन बाद ही हालात बदल गए। आज दोनों अच्छी नौकरी कर लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन गए हैं। रक्षाबंधन का दिन इनके लिए साल में सबसे अहम होता है।
विज्ञापन

शहर के खकरा कॉलोनी निवासी अनुभव और अनुभूति जौहरी जुड़वा भाई बहन हैं। इनके माता -पिता का निधन वर्ष 2010 में कुछ महीनों के अंतराल पर अचानक हो गया। अचानक निधन से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। इस पर रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया। अनुभव के अनुसार उन दिनों वे करीब 15 वर्ष के थे और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी। अचानक हालात बदलने से कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि घर कैसे चलाएं। इसके साथ ही पढ़ाई कैसे पूरी की जाए। इन हालातों में अनुभव ने पहले एक प्राइवेट सेक्टर में कलेक्शन का काम शुरू किया। बहन ने घर का काम संभाला और अच्छा करने को प्रेरित करती रही। कुछ दिन बाद दोनों ने बीकॉम में एडमिशन ले लिया। अनुभव नौकरी के साथ पढ़ाई करते रहे। अनुभूति भी कुछ अच्छा करने के लिए पढ़ाई में जुट गईं। कुछ ही सालों में दोनों की मेहनत रंग लाई। अनुभूति का एचडीबी बैंक बरेली में बतौर एकाउंटेंट में चयन हो गया। इधर, अनुभव ने एमेजन में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत हो गए। दोनों के लिए रक्षाबंधन का दिन काफी अहम हैं। हर साल अनुभव अपनी बहन के लिए गिफ्ट जरूर खरीदते हैं। दोनों का कहना है कि आपसी प्रेम से ईश्वर भी मदद करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें