शहर के मोहल्ला मस्जिद पठानी स्थित नाले में भरा कूड़ा।संवाद
पीलीभीत। बारिश शुरू होने से पूर्व शहर के नालों की तलीझाड़ सफाई का दावा किया जाता रहा, अब जब बारिश शुरू हो चुकी है तो नई समयसीमा निर्धारित की गई है। फिलहाल नालों और नालियों की सफाई में एक हफ्ता और लगेगा। ऐसे में नगरपालिका के रवैये से शहरवासियों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
बारिश शुरू होने से पूर्व हर साल पालिका प्रशासन नालों की तलीझाड़ सफाई कराता है। यह और बात है कि हर साल ही इस कार्य की पोल एक दिन की बारिश से खुल जाती है। इसके बावजूद नगर पालिका के अध्यक्ष और ईओ कोई सख्ती नहीं करते।
इस वर्ष भी नगर पालिका की अध्यक्ष मानसून आने से पहले नालों की तलीझाड़ सफाई का दावा करतीं रहीं और महज दो दिन पूर्व हुई बारिश ने उनके दावों की पोल खोल दी। बता दें कि शहर में 38 नाले हैं। इनमें छह नाले बड़े और 32 छोटे हैं। सफाई का जिम्मा नगरपालिका पर है।
इस बार भी मानसून आने से चंद दिन पूर्व नालों के लिए 27 लाख का टेंडर निकाला गया, सफाई शुरू हुई पर मानसून आने से पहले पूरी नहीं हो सकी।
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नाला सफाई में बरती जा रही लापरवाही
पालिका की ओर से नालों की सफाई कराया जाना तो शुरू कर दिया गया, लेकिन सफाई के नाम लीपापोती की गई। नाले-नालियों से महज गंदगी को निकाला गया। तलीझाड़ सफाई नहीं की गई। यही कारण रहा कि बीते दिनों हुई बारिश में शहरवासियों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा।
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नालों की सफाई का काम कराया जा रहा है। कुछ नाले रह गए हैं। जिन्हें लगभग एक सप्ताह के भीतर साफ करा दिया जाएगा।
- डॉ आस्था अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष।