गन्ने किसानों पर बारिश की मार पड़ी है। एक तरह जहां जिले के अधिकांश किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान अभी भी कुछ चीनी मिलों पर बाकी है, वहीं पिछले दिनों तीन दिन हुई बारिश ने गन्ना किसानों की मुसीबत को और बढ़ा दिया। बेहतर उपज की आस लगाए बैठे किसानों की करीब 10 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों की माने तो गिरे हुए गन्ने को बांधकर नुकसान को कम किया जा सकता है।
जिले में इस बार गन्ने के क्षेत्रफल में 25 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है। जिले में पहले कुल 69987.36 हेक्टेयर में गन्ने की फसल थी जो इस बार बढ़कर 87762.56 हेक्टेयर हो गई। गन्ने की इस खेती से लगभग 1.25 लाख किसान जुड़े हैं। प्रारंभ में अच्छे मौसम और किसानों की मेहनत के चलते फसल अच्छी थी, जिससे क्षेत्रफल बढने के साथ ही औसत उपज भी बढने की उम्मीद थी, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश से औसतन 15 प्रतिशत फसल प्रभावित हो गई। गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार 8 से 10 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है। बारिश के साथ हवा चलने से गन्ना गिर गया है। कृषि वैज्ञानिक डा. एसएस ढाका ने बताया कि यदि समय रहते इस गन्ने को नहीं उठाया गया तो इसका वजन कम हो सकता है। जो किसान गन्ने को सीधा कर बांध रहे हैं उनकी लागत तो बढ़ेगी लेकिन उपज में ज्यादा कमी नहीं आएगी। हां गिरे हुए गन्ने से बीज उत्पादन मुश्किल पड़ेगा।