जिले के परिषदीय विद्यालयों में बुधवार से वार्षिक परीक्षाएं अव्यवस्थाआें
के बीच शुरू हो गई। विभाग द्वारा बजट के अभाव में बच्चों को न तो
प्रश्नपत्र दिए गए और न ही उत्तर पुस्तिकाएं। बच्चों ने ब्लैकबोर्ड पर लिखे
गए प्रश्न का उत्तर कॉपी से फाड़े गए पन्नों पर दिए। रोशनी की भी पर्याप्त
व्यवस्था नहीं होने पर ब्लैकबोर्ड पर लिखे प्रश्न को देखने के लिए
परीक्षार्थी मशक्कत करते देखे गए।
जिले के 1250 प्राथमिक विद्यालय और
550 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से लेकर आठ तक की वार्षिक
परीक्षा शुरू हो गई। परीक्षा दो पलियों में हुई। पहली पाली में हिंदी और
दूृसरी पाली में कला व संस्कृत विषय की परीक्षा हुई। वार्षिक परीक्षा के
पहले दिन ही परिषदीय विद्यालयों में अव्यवस्थाओं के बीच परीक्षा शुरू हुई।
अधिकतर स्कूलों में बच्चे परीक्षा के बजाए एक दूसरे से बतियाने और मौजमस्ती
करते देखे गए। वहीं शिक्षक भी एक ही स्थान पर बैठकर गपशप करते देखे गए।
उत्तर पुस्तिका की जगह पन्नों पर दी परीक्षा
पहली
पाली के दौरान नगर क्षेत्र समेत अधिकतर विद्यालयों में बच्चे उत्तर
पुस्तिकाओं के बजाय कॉपी से फाड़े गए पन्नों पर परीक्षा देते देखे गए।
हालांकि कुछ बच्चे बाजार से खरीदकर कर लाई गई उत्तर-पुस्तिका पर परीक्षा
देते पाए गए।
प्रश्नपत्र न मिलने पर लिया ब्लैकबोर्ड का सहारा
वार्षिक
परीक्षा को लेकर हर साल डायट द्वारा प्रश्नपत्र का मॉडल जारी किया जाता
है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। प्रत्येक विद्यालय में वहीं के शिक्षकों
द्वारा प्रश्नपत्र तैयार किए गए और उन्हें ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया गया।
शुरू हुई वार्षिक परीक्षाएं
हजारा।
ट्रांस शारदा क्षेत्र के 33 प्राथमिक एवं 14 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में
बुधवार से वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई। एनपीआरसी राधेश्याम गुप्ता ने
भरतपुर, लक्ष्मणनगर, चंदनगर विद्यालयों में पहुंचकर परीक्षा का जायजा लिया।