पीलीभीत/ पूरनपुर। जिले में पूरनपुर आईटीआई का संचालन हो रहा है, लेकिन कक्षाएं यहां नहीं चलतीं। पढ़ाई के लिए पूरनपुर और आसपास के विद्यार्थियों को 40 किमी दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इसकी वजह है पूरनपुर आईटीआई का अधूरा भवन। करीब आठ वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी यहां का भवन नहीं बन सका है, जबकि प्रवेश हर साल लिए जाते हैं।
पूरनपुर नगर में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के भवन का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू हुआ था। दिसंबर 2017 से काम ठप पड़ा है। भवन अधूरा होने की वजह से कक्षाओं का संचालन पीलीभीत आईटीआई परिसर में हो रहा है। यहां करीब 396 सीटें हैं। फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, कोपा आदि ट्रेड में छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कुछ माह पूर्व प्रदेश के 62 राजकीय औद्याेगिक प्रशिक्षण संस्थानों को टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से अपग्रेड किए जाने की सूची जारी हुई थी। इसमें पूरनपुर आईटीआई भी शामिल है। आईटीआई अपग्रेड होने से वर्कशाप, लैब व अन्य व्यवस्थाएं बेहतर होंगी। कई अन्य कोर्स भी बढ़ जाएंगे।
सवाल यह है कि जब भवन ही नहीं है तो अपग्रेड क्या होगा। विद्यार्थियों को आईटीआई के खुद के भवन में कब प्रशिक्षण मिलेगा, यह भी बड़ा सवाल है। पीलीभीत आईटीआई के प्रधानाचार्य शरत चंद्र सागर वाल ने बताया कि भवन न होने की वजह से पूरनपुर आईटीआई का संचालन पीलीभीत परिसर में हो रहा है। प्रवेश प्रक्रिया चल रही है।
नोटिस के बाद भी कार्यदायी संस्था ने शुरू नहीं किया कार्य
पूरनपुर आईटीआई का भवन नगर से करीब चार किलोमीटर दूर गांव में बन रहा है। निर्माण वर्ष 2013 में 1.38 करोड़ रुपये से शुरू कराया गया था। दिसंबर 2017 से काम ठप पड़ा है। बताया जा रहा है कि कार्यदायी संस्था को नोटिस भी दिए गए, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। अब जिम्मेदार भी अधूरे निर्माण को लेकर बेपरवाह हैं।