पीलीभीत/बिलसंडा। डीएम के निर्देश पर दियोरियाकलां गोशाला से करेली गोशाला में पशुओं को भेजने की कवायद ग्रामीणों के विरोध के चलते धरी रह गई। ग्रामीणों ने दूसरे गांवों के पशुओं को रखने से पूर्व क्षेत्र के आवारा पशुओं को पकड़वाने की मांग रख दी। समझाने पर भी जब ग्रामीण नहीं मानें तो अफसर पशुुओं से लदा ट्रक वापस ले गए।
बीसलपुर तहसील क्षेत्र के दियोरियाकलां गांव में 60 पशुओं की क्षमता वाली गोशाला संचालित है। गोशाला में पशुओं की संख्या 150 के पार पहुंच गई थी। 69 गोवंशीय पशुओं को बिलसंडा ब्लॉक की 200 की क्षमता वाली करेली गोशाला में शिफ्ट करने की तैयारी की है। डीएम से अनुमति लेने के बाद तहसीलदार बीसलपुर आशुतोष कुमार, बीडीओ बिलसंडा नीरज दुबे, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रिंकू नारायण मंगलवार रात ट्रकों में 69 पशुओं को लादकर करेली गोशाला पहुंच गए। भनक लगते ही काफी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए और विरोध जताने लगे।
ग्रामीणों का कहना था कि करेली, सिंधौरा, गौहरपुर, चांदपुर समेत आसपास के कई गांवों में आवारा पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। पहले उन्हें पकड़वाकर करेली गोशाला भिजवाएं, इसके बाद ही अन्य पशु रखे जा सकते हैं। अधिकारियों ने उन्हें काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। ट्रक के आगे लेटने की धमकी तक दे डाली।
करीब एक घंटे तक ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच कहासुनी होती रही। मगर ग्रामीण शांत नहीं हुए। अंत में अधिकारी ही बैकफुट पर आए और पशुओं से लदा ट्रक वापस दियोरियाकलां गोशाला ले गए। जानकारी के मुताबिक, पशुओं को दियोरियाकलां गोशाला में ही रखवा दिया गया है। फिलहाल पशुओं को शिफ्ट करने की कवायद पूरी नहीं हो सकी। अब अधिकारी आगे की रणनीति भी साफ नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रामीणों के विरोध के चलते पशु करेली गोशाला में नहीं रखवाए जा सके हैं। अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, जो भी निर्देश मिलेंगे, उसी के तहत काम किया जाएगा। - डॉ. रिंकू नरायण, पशु चिकित्साधिकारी