पीलीभीत। बरेली- सितारगंज हाईवे की जर्जर स्थिति की तरफ से अफसरों के आंखें बंद करे रखने पर आखिरकार लोगों का गुस्सा फूट ही गया। क्रांतिकारी विचार मंच के बैनर तले लोगों ने कई बार मरम्मत की मांग पर ध्यान न देने के कारण खमरिया पुल पर प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। हादसों का सबब बनते जा रहे इस हाईवे की जल्द मरम्मत न कराने पर चार सितंबर से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई।
बरेली सितारगंज हाईवे पिछले काफी समय से जर्जर है। जगह-जगह गड़्ढे हो गए हैं। कस्बा अमरिया के पास तो कुछ हिस्सा दलदलनुमा बन चुका है। इसमें अक्सर बड़े वाहन फंस जाते हैं। इसकी वजह से न सिर्फ घंटों जाम लगा रहता है, बल्कि हादसे का डर भी रहता है। इस स्थिति को अमर उजाला ने 23 अगस्त के अंक में प्रकाशित किया था। वहीं किसान नेता एवं क्रांतिकारी विचार मंच के प्रांतीय संरक्षक देव स्वरूप पटेल ने भी बीते दिनों बरेली के मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर सुधार की मांग की थी। इसके बाद भी सुधार कार्य शुरू तक नहीं किया गया। गुस्साए क्रांतिकारी मंच के कार्यकर्ता बरेली रोड पर खमरिया पुल के पास मंगलवार दोपहर एकत्र हुए। उन्होंने जर्जर हाईवे का सुधार न होने पर नाराजगी जताई। प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई। उनका कहना था कि आए दिन लोग जर्जर हाईवे में हादसे का शिकार होते हैं। बीते सालों में भीषण हादसे भी हो चुके हैं। दो साल पहले जर्जर हाईवे की वजह से नेपाली बस और कार की टक्कर हुई थी। इसमें पांच लोग मर गए थे। इसके अलावा एक अन्य हादसे में कार सवार सात लोगों की जान गई। मंगलवार को भी कुतुबखाना बरेली निवासी नितीश रस्तोगी और निधी रस्तोगी पीलीभीत से लौटते वक्त गड्ढे से बचने के प्रयास में कार से टकराकर घायल हो गए। संगठन के संरक्षक ने घायल दंपती को इलाज के लिए भिजवाया। करीब आधे घंटे तक हाईवे पर खमरिया पुल के पास एकत्र होकर प्रदर्शन किया गया। जल्द सुधार न कराए जाने पर चार सितंबर से धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई। प्रदर्शन करने वालों में प्रभू दयाल, कुंवरसेन गंगवार, अनीस अहमद, अब्दुल रसीत, होरी लाल गंगवार गंगाराम मोर्य, गौरीशंकर धर्मवीर आदि मौजूद रहे।
पीडब्ल्यूडी में चल रहा पटल का खेल..तभी तो सड़कों की गुणवत्ता फेल
पीलीभीत। पीडब्ल्यूडी में भले ही सड़कों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा हो, मगर विभाग में पटलों को लेकर खेल चरम पर है। ठेकेदारों से कमीशनबाजी के मामले जगजाहिर हैं। वहीं सांठगांठ ठीक से बैठाने के लिए चहेते बाबुओं को अहम पटलों की जिम्मेदारी दे दी गई है। खास बात यह है कि अफसरों के खास बाबू ठेकेदारों से सांठगांठ कर काम कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। नतीजतन ठेकेदारों को भुगतान में दिक्कत नहीं होती, काम भले ही धरातल पर ठीक न किया हो। कभी कभार कोई शिकायत हो भी जाए तो अफसर ध्यान नहीं देते।
बीते एक साल से पीडब्ल्यूडी में लिपिकों के बढ़ाए गए काम को लेकर मामला सुर्खियों में है। विभागीय स्तर पर भी इसे लेकर खींचतान छिपी नहीं है। सड़कों के निर्माण और मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। मगर धरातल पर नतीजा नहीं निकलता। इसके पीछे खर्च किए गए बजट का बंदरबांट अहम वजह माना जाता है। अफसर अगर सही ढंग से निगरानी करें तो निर्माण के समय ही तमाम गड़बड़ी पकड़ी जा सकती है। मगर ऐसा नहीं किया जाता। ठेकेदारों का भुगतान कराने में बाबू अहम भूमिका निभाते हैं। खास लिपिकों को मुख्य पटलों का चार्ज दिला दिया जाता है। वैसे तो पीडब्ल्यूडी में कुल 16 लिपिक हैं। वर्तमान में भी कुछ लिपिकों के नाम विभाग में ही सुर्खियों में है। ये लिपिक भले ही नए हो, मगर अफसरों के करीबी के तौर पर पहचान रखते हैं।
बताते हैं कि इसी तरह के एक लिपिक पर अफसर इतना मेहरबान हुए कि सीनियर लिपिकों से काम हटाकर बजट, आईजीआरए समेत कई पटल का कार्यभार सौंप दिया। बीसलपुर के एक लिपिक की भी नजदीकी खासा चर्चा में रहती है। ठेकेदारों को अपना भुगतान कराने के लिए इन्हें खुश करना ही पड़ता है। अगर कोई इन लिपिकों की शिकायतों कर भी दे तो अधिकारियों के स्तर से नजरअंदाज कर दिया जाता है। विभाग में ही चर्चा तेज है कि एक ठेकेदार ने एक लिपिक की शिकायत भी की, मगर उस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। अफसर भी इस मुद्दे पर बोलने से बचते हैं।