पीलीभीत। प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमानी के चलते अभिभावक भी थक हारकर घर बैठ गए हैं। बच्चों की किताबों के चक्कर में अभिभावकों का बजट बिगड़ गया है। तमाम अभिभावक कर्ज लेकर अपने बच्चों के लिए नया कोर्स खरीदने को मजबूर है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग कार्रवाई करने बजाय खामोश है। स्कूल संचालकों से कोई यह पूछने वाला नहीं कि आखिर शासन से आदेश होने के बाद भी कोर्स में बदलाव क्यों कर रहे हैं।
प्रत्येक नए शैक्षिक सत्र में हर अभिभावक से स्कूल प्रबंधकों द्वारा किसी न किसी मद के नाम से पैसा पूरे साल वसूला जाता है। इसके अलावा हर साल किताबों में बदलाव के नाम पर अभिभावकों को नया कोर्स खरीदने के लिए मजबूर करना परंपरा सा हो गया है। निजी स्कूलों पर इसका किसी तरह अंकुश नहीं है। अभिभावकों को नया कोर्स खरीदने के नाम पर हर साल लुटना पड़ता है। मगर, कोरोना संक्रमण फैलने के बाद इस बार शासन ने निर्देश दिए थे कि प्राइवेट विद्यालय कोर्स में बदलाव नहीं करेंगे। अगर कोई भी छात्र पुराना कोर्स खरीदकर पढ़ाई कर रहा है, तो उसके ऊपर नया कोर्स खरीदने का दबाव नहीं डालेंगे। इसके बाद भी शहर के नामी गिरामी निजी और कॉन्वेंट स्कूलों ने प्री नर्सरी से इंटर तक प्रत्येक क्लास में तीन से चार किताबें बदलकर अभिभावकों को नया कोर्स खरीदने पर मजबूर कर दिया है। प्राइवेट स्कूल संचालक अभिभावकों को लॉकडाउन में तमाम लोगों के बेरोजगार होने के बाद भी निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदवा रहे हैं।
सबको पता है कि नया कोर्स खरीदने में स्कूल और स्टेशनरी दुकानदारों और प्रकाशक के बीच कमीशन का खुला खेल चलता है। निजी प्रकाशन की किताबों में एनसीआरटी की किताबों से तीन गुना अधिक दाम की आती हैं। इनमें एक हिस्सा तो असली खर्चे का होता है। बाकी दो हिस्से कमीशन में जाते हैं। शिक्षा विभाग ने भी इस मामले में कोई कार्रवाई करना उचित नहीं समझा। लॉकडाउन में नया कोर्स खरीदने में नौकरी पेशा और व्यापार करने वाले अभिभावकों की हालत खराब है। अगर किसी के दो बच्चे हैं तो उन्हें इस साल पढ़ाना भारी पड़ रहा है। कुछ अभिभावकों की मानें तो स्कूलों में कोर्स से हटकर बच्चों को होमवर्क दिया जा रहा है। किस स्कूल ने अपने यहां किन कक्षाओं में कोर्स बदला, इसकी सूचना बीएसए और डीआईओएस को नहीं दी गई है।
शासन के निर्देश के बाद प्राइवेट विद्यालयों को कोर्स न बदलने का निर्देश दिए थे। अभी तक किसी भी विद्यालय ने कोर्स बदलने की जानकारी नहीं दी है। अभिभावक भी शिकायत करने नहीं आए। फिर भी इसे चेक कराया जाएगा। -संतप्रकाश, डीआईओएस