राजीव गांधी सेवा केेंद्रों के निर्माण में बड़ा गड़बड़ झाला सामने आ रहा है। खुद को फंसता देख अधिकारियों ने निर्माण पूरा न करने पर जांच के बाद आननफानन में 178 ग्राम प्रधानों के अधिकार सीज कर उन्हें नोटिस दे दिए। अब प्रधानों से मिले नोटिस के जवाब की जांच कराई जाने को टीमें बनाई गई हैं।
जिले में 270 राजीव गांधी सेवा केंद्रों के निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। अधिकांश ग्राम पंचायतों द्वारा इसके लिए दी गई 10-10 लाख की धनराशि बैंक से निकाल ली, लेकिन निर्माण पूरे नहीं कराए गए। हैरानी की बात यह है कि दो साल से अधिक समय तक किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद मामला जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में उछलने और सदस्यों द्वारा सीबीआई से इसकी जांच कराने की मांग करने के बाद अधिकारियों में खलबली मची। अधिकारियों ने अपनी गर्दन फंसती देख टीम बनाकर इसकी जांच कराई और जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार कर 178 प्रधानों के अधिकार सीज कर रिकवरी नोटिस जारी कर दिए। हालांकि की रिकवरी की दो तीन लाख रुपये की रकम प्रधानों को जमा करना कोई मुश्किल नहीं है, लेकिन यदि वह ऐसा करते हैं कानून उन पर दोष सिद्ध हो जाता है और पुन: चुनाव लड़ने से वंचित हो सकते हैं। अधिकारियों ने सभी प्रधानों से रिकवरी नोटिस का जवाब देने और इसी बीच काम पूरा करने के मौन स्वीकृति दे दी। अब कहा जा रहा है कि मेजरमेंट ठीक नहीं हुआ इसलिए पुन: इसकी जांच व मेजरमेंट कराया जाएगा। फिलहाल प्रधानों के साथ खुद की गर्दनें बचाने का प्रयास चल रहा है।
कुछ प्रधानों ने नोटिस के जवाब देकर मेजरमेंट दुबारा कराने का अनुरोध किया है। इस पर जांच को टीम बनाई गई है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। किसी को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। - इंद्रदेव द्विवेदी, सीडीओ