पीलीभीत। पीटीआर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और भारतीय वन्यजीव संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में मानव वन्यजीव आपातकालीन मानव प्रभुत्व परिदृश्य का प्रबंधन विषय पर कार्यशाला हुई। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि वन्यजीव बहुल्य क्षेत्र में संघर्ष निवारण में सहयोग के लिए टीम को प्रशिक्षित करें।
कार्यशाला में बिजनौर, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखीमपुर, बहराइच, बलरामपुर, महाराजगंज, पीलीभीत, दुधवा टाइगर रिजर्व, नैनीताल समेत 38 पशु चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम ने पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित करते हुए बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू के व्यवहार से अवगत कराया।
परिस्थितियों के अनुसार, वन्यजीव का रेस्क्यू करने की बारीकियां बताईं। आशीष बिष्ट, डॉ. अनिल सिंह हेड तराई आर्क लैंड, डॉ. एबी श्रीवास्तव ने भी वन्यजीव संरक्षण और संघर्ष की रोकथाम के अनुभव साझा किए। कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि एसपी अभिषेक यादव ने कहा कि मानवता को बचाने के लिए वन्यजीवों का संरक्षण अति आवश्यक है।
संरक्षण एवं संघर्ष निवारण के लिए पुलिस हमेशा सहयोग के लिए तत्पर है। डीएफओ मनीष सिंह ने प्रशिक्षण कार्यशाला में आए पशु चिकित्सकों का स्वागत किया। सामाजिक वानिकी डीएफओ भरत कुमार डीके ने ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष और आवारा कुत्तों से वन्यजीवों में फैलने वाली बीमारियों से अवगत कराया। संचालन नरेश कुमार वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने किया।