पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवती, प्रसूताएं और महिला मरीजों की दिक्कतों से जिम्मेदार बेखबर हैं। अस्पताल में लगीं दोनों लिफ्ट कई वर्षों से शोपीस बनी हैं। गर्भवती और अन्य महिलाएं दर्द से कराह कर रैंप के रास्ते चिकित्सक और वार्ड तक पहुंच रहीं हैं। प्रसव पीड़ा से कराहती महिलाएं भी रैंप पर चढ़ने को मजबूर हैं।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला महिला अस्पताल का भवन चार मंजिला है। भूतल पर प्रसव कक्ष, प्रथम तल पर बच्चों व गर्भवती महिलाओं की ओपीडी व दूसरे व तीसरे तल पर प्रसव के बाद महिलाओं व बच्चों की भर्ती के लिए वार्ड बने हैं।
मरीजों की सुविधा के लिए एमसीएच विंग में दो अलग-अलग लिफ्ट लगाई गईं हैं। मगर, यह सिर्फ दिखावा बनकर रह गईं हैं। वर्षों से दोनों ही लिफ्ट का संचालन बंद है। इसकी वजह तकनीकि खराबी बताई जा रही है। गर्मी के मौसम में जब एक सामान्य व्यक्ति के लिए रैंप पर चढ़ना मुश्किल है, ऐसे में गर्भवती और प्रसूताओं को रैंप के रास्ते चिकित्सक और वार्ड तक जाना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा गर्भवती झेल रहीं है।
लिफ्ट में तकनीकी खराबी है। इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, मंजूरी मिल गई है। एक सप्ताह में लिफ्ट शुरू हो जाएगी।
- डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
महिला अस्पताल में खराब पड़ीं दोनों लिफ्ट की कई बार जानकारी मिली है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज को पत्र भी लिखा जा चुका है। कार्रवाई के लिए फिर से पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. आलोक कुमार शर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी
पति से सहारे रैंप के रास्ते इलाज के लिए जाती महिला। संवाद
पति से सहारे रैंप के रास्ते इलाज के लिए जाती महिला। संवाद
पति से सहारे रैंप के रास्ते इलाज के लिए जाती महिला। संवाद