पीलीभीत। बिजली चोरी की घटनाओं को रोकने के नाम पर शासन-प्रशासन स्तर पर जितना शोर मचा, उतना काम नहीं किया गया। इसकी रोकथाम के लिए बंच कंडक्टर लाइन डालने को काम तो शुरू कराया गया, लेकिन 20 प्रतिशत के आसपास पहुंचते ही बजट के लाले पड़ गए। बकाया 80 प्रतिशत काम रुके हुए ढाई वर्ष से ज्यादा हो गया है। ऐसे में बिजली चोरी पर नकेल कसने को शुरू की गई मुहिम पस्त पड़ गई। हालात बदतर होते जा रहे हैं।
जर्जर तार टूटने से होने वाले हादसे और बिजली चोरी रोकने के लिए बंच कंडक्टर लाइन डालने की योजना लाई गई थी। बंच कंडक्टर लाइन के बॉक्स से ही उपभोक्ता को पोल से कनेक्शन दिया जाना था। माना गया कि ऐसा होने के बाद कटिया डालकर होने वाली बिजली चोरी रोकी जा सकेगी। यह भी माना गया कि जब तार टूटेंगे नहीं तो बेहतर आपूर्ति दी जा सकेगी। इसके लिए पावर कॉरपोरेशन की ओर से आरपीडीएस योजना (इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम) के तहत वर्ष 2015 में काम शुरू कराया गया। इसकी जिम्मेदारी आरके इंडस्ट्रीज फर्म को दी गई थी। शहर की बात करें तो इस योजना के तहत 28 किमी के इलाके में बंच कंउक्टर लाइन डाली जानी थी। छतरी चौराहा, अशोक कॉलोनी, सुनगढ़ी आवास विकास समेत चंद इलाकों में पांच से छह किमी के दायरे में ही काम हो सका और मध्य 2017 में बजट समाप्त हो गया। शहर के 80 प्रतिशत इलाकों में यह काम नहीं हो पाया। ढाई साल बाद भी भी यह काम बाकी है। इसकी शुरुआत भी नहीं हो पा रही। ऐेसे में मुहिम शहर के लिए कोई फायदा नहीं दे सकी।
बंच कंडक्टर लाइन बिछाने पर वैसे तो शहर में न के बराबर काम हुआ, लेकिन अगर किए गए 20 प्रतिशत काम पर ही बात करें तो ये गले नहीं उतरता। इससे जुड़े कुछ लोगों ने भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि बंच कंडक्टर लाइन घनी आबादी वाले ऐसे इलाकों में होनी चाहिए थी, जहां घरों के नजदीक से तार गुजर रहे हैं, या फिर पोल नजदीक है। ताकि कोई आसानी से कटिया डालकर बिजली चोरी न कर सके। आसफजान, साहूकारा, लाल रोड, बाजार, नई बस्ती, डोरीलाल, आवास विकास, खुदागंज समेत कई इलाके घनी आबादी वाले हैं। लेकिन शहर में हुआ अधिकांश काम टनकपुर हाईवे और शहर के बाहरी हिस्सों में किया गया है। काम की गति भी काफी धीमी रही।
शहर वासियों के सामने जर्जर तार की समस्या अघोषित कटौती का सबब बनी रहती है। गर्मी में हालात बदतर होने में देर नहीं लगती। इसके अलावा हल्की हवा चलने और बारिश में बिजली ठप होना आम बात है। शहर में 20 किमी के जर्जर तार चिह्नित किए जा चुके हैं। मगर इनका सुधार कराने के लिए भी बजट या फिर कोई योजना नहीं है। सालों से जर्जर तार में होने वाले फाल्ट से घंटों बिजली गुल रहती है।
पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों के अनुसार शहर में लाइन लॉस 21 प्रतिशत है। अगर बंच कंडक्टर लाइन पड़ जाए तो इसमें काफी सुधार हो सकेगा। ग्रामीण इलाकों में लाइन लॉस 40 प्रतिशत है। हालांकि पूरनपुर, मझोला, बीसलपुर, कलीनगर आदि कई इलाकों में जहां बंच कंडक्टर लाइन डाली जा चुकी हैं वहां लाइनलॉस में कमी भी आई है।