पीलीभीत। बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को प्रसवोत्तर अवसाद (तनाव) परेशान कर रहा है। जिले में भी इस तरह के मामले बढ़े हैं। जिला अस्पताल के मन कक्ष में प्रति माह में आठ से 10 महिलाएं पहुंच रही हैं। महिलाएं स्वभाव में चिड़चिड़ापन, निराश और किसी काम में मन न लगने की स्थिति का शिकार हो रही हैं। खास बात यह कि इसकी पहचान भी मुश्किल से हो रही है।
जिला अस्पताल के मन कक्ष में पहुंची शहर निवासी एक महिला को यह समस्या है कि उसका किसी काम में मन नहीं लग रहा था। सब सही होने के बाद भी अजीब से उदासी रहने की बात कही। साथ ही यह भी लगता था कि परिवार के लोग उसे तवज्जो नहीं दे रहे हैं। मन कक्ष की सह प्रभारी पल्लवी सक्सेना ने उनकी काउंसिलिंग की तो पता चला कि यह स्थिति प्रसव के कुछ समय बाद से शुरू हुई है। लक्षणों की पहचान के बाद महिला को प्रसव के बाद होने वाले तनाव की जानकारी दी गई। बचाव के उपाय और टेली मानस नंबर के बारे में बताया गया। पल्लवी सक्सेना ने बताया कि प्रसवोत्तर अवसाद के मामले बढ़ेे हैं। महिलाएं इसे समझ नहीं पाती हैं।
स्वभाव में बदलाव से हो रहा मनमुटाव
प्रसवोत्तर अवसाद की वजह से महिलाओं के स्वभाव में आ रहा बदलाव आपसी मनमुटाव का कारण भी बन रहा है। महिलाओं को लगता है कि उन्हें तवज्जो नहीं दी जाती। निराशा का भाव बढ़ता है। पल्लवी सक्सेना ने बताया कि इस स्थिति से बचने के लिए परिवार के सदस्यों को समय दें। अधिक नींद लेनी चाहिए। अपने रुचि के कामों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
200 से अधिक महिलाओं को किया जागरूक
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 10 अक्तूबर से अब तक जिले में सीएचसी, स्कूल-कॉलेज व अलग-अलग स्थानों पर हुए कार्यक्रम में पल्लवी सक्सेना ने करीब 200 महिलाओं को जागरूक किया। 100 महिलाओं की काउंसिलिंग की गई। टेली मानस नंबर-14416 के बारे में जानकारी दी और समस्या होने पर कॉल करने की सलाह दी।