पीलीभीत। जिले में तीन वर्ष की छह हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं। मछली पालन, सिलाई, बैग निर्माण और कैंटीन संचालन आदि के काम से इन महिलाओं की आय बढ़ी है। मेहनत के बलबूते महिलाएं अपने परिवार की आजीविका में सहारा बनी हैं। लखपति दीदी से प्रेरित होकर कई अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) को तीन वर्ष में जिले की 14840 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया गया। इसके सापेक्ष विभाग ने 15170 महिलाओं को चिह्नित किया। इन महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया। विभाग की ओर से महिलाओं को समूह से जोड़कर और स्वरोजगार के जरिए 6246 महिलाएं लखपति दीदी बनाई जा चुकी हैं। इन महिलाओं ने स्वरोजगार से अपनी आर्थिकी बदली है।
ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आजीविका का सहारा बनी हैं। आत्मनिर्भरता की कहानी भी लिख रही हैं। ब्लॉक मरौरी की ग्राम पंचायत चंदोई की तराना प्रेरणा कैंटीन और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का कार्य संभाल रही हैं। तराना ने बेहतर काम कर खुद की आय में बढ़ोतरी की है। फरदिया की दरक्शा बी मलिक ने जरी-जरजोदी के काम को अपनी आय का साधन बनाया है। समूह के सहयोग से वह परिवार की आजीविका में हाथ बंटा रही हैं। दरक्शा बी भी लखपति दीदी की सूची में शामिल हैं।
नगरिया कॉलोनी की बसंती हलदर फास्ट फूड का ठेला लगा रही हैं। उन्होंने खानपान से ही खुद की आर्थिकी को मजबूत किया है। बैकेनिया ताल्लुक रामपुर अमृत की पूजा देवी बैंक सखी के साथ ही दोना-पत्तल का भी कार्य रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वह संगठन से जुड़कर उत्पाद बना रही हैं। इससे उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है।
कुशल कामगार बनने के लिए प्रशिक्षण भी दे रहा विभाग
समूह से जुड़ी महिलाओं को कुशल कामगार बनाने के लिए एनआरएलएम की ओर से प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके बाद महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। रोजगार स्थापित करने में महिलाओं की मदद भी विभाग की ओर से की जाती है।