पीलीभीत। बाघों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए पहचाने जाने वाले पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) से एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है। यहां कांटेदार जानवर सेही की बेहतर मौजूदगी दर्ज की गई है। पूर्व में हुई गणना के दौरान पीटीआर की प्रत्येक रेंज में सेही की बेहतर संख्या मिली है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सेही की यह सक्रियता रिजर्व की जैव विविधता और खाद्य श्रृंखला के संतुलन का सकारात्मक संकेत है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में तृणभोजी वन्यजीवों की वर्तमान मौजूदगी की हकीकत परखने के लिए टाइगर रिजर्व की ओर से इस साल गणना कराई गई थी। कैमरा ट्रैप निगरानी के दौरान बीते कुछ महीनों में सेही की गतिविधियों को दर्ज किया गया। इसमें स्पष्ट हुआ कि पीटीआर के कोर और बफर जोन दोनों क्षेत्रों में सेही की बेहतर मौजूदगी दर्ज की गई है।
सेही की मौजूदगी बताती है कि जंगल का पर्यावरण अनुकूल है। वन अधिकारियों का कहना है कि यह छोटा लेकिन अहम जीव न केवल शिकारियों से खुद को बचाने में सक्षम है, बल्कि जंगल की पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती देता है। बाघ जैसे बड़े शिकारी जीवों की मौजूदगी के साथ-साथ ऐसे मध्यम स्तर के जीवों का पनपना जंगल के स्वास्थ्य को दर्शाता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सेही जैसे जीव मिट्टी को खोदकर उसकी उर्वरता बढ़ाने और बीजों के फैलाव में मदद करते हैं। यही वजह है कि इनकी मौजूदगी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। डीएफओ मनीष सिंह के अनुसार पीटीआर में सेही की यह सक्रियता इस क्षेत्र की जैव विविधता का अनूठा उदाहरण है और यह साबित करती है कि यहां केवल बाघ ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित आवास उपलब्ध है। संवाद
सेही का शिकार करने से बचता है बाघ
विशेषज्ञों का मानना है कि सेही अपने शरीर के लंबे व नुकीले कांटों से दुश्मनों से बचाव करता है। खतरा महसूस होते ही इसके कांटे खड़े हो जाते हैं और शिकारियों को चोट पहुंचा सकते हैं। कई बार जंगल में बाघ और सेही का आमना-सामना होने पर बाघ सेही का शिकार करने से बचता है, क्योंकि उसके कांटे बाघ की आंखों और मुंह तक को गंभीर रूप से घायल कर सकते हैं। फिर भी बाघ शिकारी स्वभाव से कभी-कभी सेही पर हमला कर देता है, लेकिन अक्सर उसे असफलता हाथ लगती है।
सेही के बारे में रोचक तथ्य
- सेही अपने शरीर पर मौजूद लंबे कांटों से दुश्मनों से बचाव करता है। खतरा महसूस होने पर ये कांटे खड़े हो जाते हैं।
- इनकी औसत उम्र 15-20 साल तक होती है।
- सेही मुख्य रूप से शाकाहारी होता है और जड़ों, फलों, कंदों व सब्जियों पर निर्भर रहता है।
- यह रात में सक्रिय रहता है और दिन में बिलों में छिपकर आराम करता है।
- कृषि क्षेत्रों के आसपास भी इसकी मौजूदगी पाई जाती है, जहां यह फसलों को नुकसान भी पहुंचाता है।
बराही में सेही की मौजूदगी सबसे अधिक
पूर्व में कराई गई गणना में सेही की सबसे अधिक मौजूदगी पीटीआर की बराही रेंज में दर्ज की गई। बराही में 277, माला में 264, महोफ में 273, हरीपुर में 152 व दियोरिया में 71 सेही की मौजूदगी दर्ज की गई। कुल संख्या 1037 दर्ज की गई है।